



शिमला/विवेकानंद वशिष्ठ:- भाजपा सांसद कंगना रनौत द्वारा हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के खिलाफ दिए गए हालिया बयानों पर रजत राणा सोशल मीडिया ने कड़ा पलटवार किया है।

“हिमाचल की चिंता है तो दिल्ली में प्रदेश के हक की आवाज उठाएं, बयानबाजी से नहीं चलेगा काम”




कांग्रेस ने कहा है कि कंगना रनौत को प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर बयान देने से पहले तथ्यों और संवैधानिक व्यवस्थाओं की पूरी जानकारी लेनी चाहिए। केवल राजनीतिक सुर्खियां बटोरने के लिए हिमाचल प्रदेश और प्रदेश की चुनी हुई सरकार को बदनाम करना किसी भी रूप में उचित नहीं है।






रजत राणा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की जनता ने विधानसभा चुनाव में अपना स्पष्ट जनादेश दिया है और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार पूरी जिम्मेदारी के साथ जनता के हित में काम कर रही है।


सरकार ने सत्ता संभालने के बाद आर्थिक चुनौतियों के बावजूद व्यवस्था को पटरी पर लाने, भ्रष्टाचार पर रोक लगाने, सरकारी संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और आम जनता को राहत देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।




रजत राणा ने सवाल उठाया कि यदि कंगना रनौत को वास्तव में हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति और प्रदेश के भविष्य की इतनी चिंता है, तो उन्हें अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल केंद्र सरकार के समक्ष हिमाचल के लंबित अधिकारों और आर्थिक सहायता के मुद्दे उठाने के लिए करना चाहिए।


“प्रदेश को भाषण नहीं, केंद्र से उसका हक चाहिए”
रजत राणा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश एक पहाड़ी और सीमावर्ती राज्य है, जहां प्राकृतिक आपदाओं, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के कारण सरकार के सामने अलग तरह की चुनौतियां रहती हैं। ऐसे में प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर राजनीति करने के बजाय केंद्र सरकार से हिमाचल के लिए विशेष आर्थिक पैकेज, आपदा राहत, लंबित वित्तीय सहायता और प्रदेश के अधिकारों की पैरवी करना भाजपा नेताओं की जिम्मेदारी है।
रजत राणा ने कहा कि मंडी की सांसद होने के नाते कंगना रनौत को संसद और केंद्र सरकार के सामने हिमाचल की आवाज मजबूती से उठानी चाहिए। प्रदेश की जनता ने उन्हें इसी उम्मीद से अपना प्रतिनिधि चुना है कि वे दिल्ली में हिमाचल के हितों की पैरवी करेंगी।
लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि जब प्रदेश को केंद्र से मदद की आवश्यकता होती है, तब हिमाचल के अधिकारों की बात करने के बजाय भाजपा के कुछ नेता प्रदेश की चुनी हुई सरकार पर ही आरोप लगाने लगते हैं।

मुख्यमंत्री सुक्खू के खिलाफ बयानबाजी से जनता का ध्यान नहीं भटकाया जा सकता
रजत राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हमेशा हिमाचल के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। प्रदेश सरकार आर्थिक चुनौतियों के बीच भी कर्मचारियों, किसानों, बागवानों, महिलाओं, युवाओं, आपदा प्रभावित परिवारों और आम नागरिकों के हित में लगातार फैसले ले रही है।
सरकार ने व्यवस्था परिवर्तन की बात केवल मंचों से नहीं की, बल्कि सरकारी खर्च में अनुशासन, राजस्व बढ़ाने और प्रदेश के संसाधनों को मजबूत करने की दिशा में भी कदम उठाए हैं।
रजत राणा ने कहा कि भाजपा को यदि सरकार के किसी फैसले पर आपत्ति है तो वह आंकड़ों और तथ्यों के साथ चर्चा करे। व्यक्तिगत टिप्पणियों और राजनीतिक आरोपों से प्रदेश की समस्याओं का समाधान नहीं होगा।
1. हिमाचल प्रदेश को केंद्र से मिलने वाली लंबित आर्थिक सहायता के लिए उन्होंने अब तक केंद्र सरकार के समक्ष कितनी मजबूती से आवाज उठाई है?
2. आपदा के दौरान हिमाचल को हुए भारी नुकसान के बाद केंद्र से अपेक्षित सहायता दिलाने के लिए उन्होंने क्या प्रयास किए?
3. हिमाचल के कर्मचारियों, किसानों, बागवानों और आपदा प्रभावित परिवारों के मुद्दे संसद में कितनी मजबूती से उठाए गए?
4. यदि उन्हें प्रदेश के बढ़ते कर्ज की चिंता है तो वे केंद्र सरकार से हिमाचल की विशेष परिस्थितियों के अनुरूप आर्थिक राहत और वित्तीय सहायता की मांग क्यों नहीं करतीं?
5. प्रदेश की जनता को यह भी बताया जाए कि केंद्र की नीतियों और वित्तीय फैसलों का हिमाचल की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा है?
रजत राणा ने कहा कि सवाल पूछना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन सवालों के साथ तथ्य और जिम्मेदारी भी होनी चाहिए।

हिमाचल की जनता सब देख रही है
रजत राणा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की जनता समझदार है और वह यह भी देख रही है कि कौन नेता केवल बयान दे रहा है और कौन नेता जमीन पर काम कर रहा है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार आर्थिक संकट से निपटने के साथ-साथ हिमाचल की विकास यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार के सामने चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन इन चुनौतियों का सामना सरकार पूरी मजबूती से कर रही है।
रजत राणा ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि हिमाचल को आर्थिक रूप से कमजोर करने वाली परिस्थितियों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए, न कि राजनीतिक तमाशा।
“कंगना जी, हिमाचल की चिंता है तो दिल्ली में आवाज उठाइए”
रजत राणा ने कंगना रनौत को नसीहत देते हुए कहा कि वह प्रदेश सरकार पर बयान देने के बजाय केंद्र सरकार से हिमाचल के लिए अधिक से अधिक आर्थिक सहायता और प्रदेश के लंबित अधिकार दिलाने की मांग करें।
“आप सांसद हैं। आपके पास संसद का मंच है। आपके पास केंद्र सरकार तक सीधी पहुंच है। अगर वास्तव में हिमाचल की चिंता है तो उस ताकत का इस्तेमाल प्रदेश के हित में कीजिए। मुख्यमंत्री पर बयान देने से न तो हिमाचल का कर्ज कम होगा और न ही प्रदेश की जनता की समस्याओं का समाधान होगा।”
रजत राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और प्रदेश सरकार को जनता के प्रति जवाबदेही का पूरा एहसास है। सरकार अपने हर फैसले और अपनी नीतियों का हिसाब जनता के सामने रखने के लिए तैयार है।
लेकिन भाजपा को भी यह स्पष्ट करना होगा कि हिमाचल के हितों के लिए केंद्र सरकार से क्या मिला और प्रदेश के हक के लिए दिल्ली में कितनी लड़ाई लड़ी गई।
व्यक्तिगत राजनीति नहीं, हिमाचल के हित की बात हो
रजत राणा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से कहीं बड़ा है। यह देवभूमि है, जहां की जनता ने हमेशा कठिन परिस्थितियों में देश और लोकतंत्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई है।
इसलिए प्रदेश के किसी भी जनप्रतिनिधि से अपेक्षा की जाती है कि वह हिमाचल की छवि को मजबूत करे, प्रदेश के हितों की आवाज उठाए और जनता के मुद्दों को प्राथमिकता दे।
कांग्रेस का स्पष्ट संदेश है कि हिमाचल को बदनाम करने की राजनीति स्वीकार नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के खिलाफ चाहे जितनी बयानबाजी कर ली जाए, प्रदेश सरकार जनता के हितों के लिए काम करती रहेगी।
कांग्रेस ने कहा कि आने वाले समय में भाजपा के प्रत्येक राजनीतिक आरोप का जवाब तथ्यों, आंकड़ों और प्रदेश सरकार के काम के आधार पर दिया जाएगा।
हिमाचल की जनता को गुमराह करने की कोशिश सफल नहीं होगी।
हिमाचल के हित और जनता सर्वोपरि हैं, प्रदेश के अधिकारों की लड़ाई पूरी मजबूती से जारी रहेगी।




