



अरूशा (तंजानिया)/विवेकानंद वशिष्ठ:- पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं हमीरपुर के सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने तंजानिया के अरूशा में आयोजित अंतर-संसदीय संघ (आईपीयू) महासभा में जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न आपदाओं से निपटने और संवेदनशील क्षेत्रों में आपदा प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने पर आयोजित चर्चा में भारत का पक्ष रखा।

हिमालयी क्षेत्रों में आपदा प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए वैश्विक सहयोग का किया आह्वान




यह चर्चा नेपाल की संसद के अध्यक्ष डोल प्रसाद आर्याल द्वारा प्रस्तुत आपातकालीन प्रस्ताव पर हुई, जिसमें हिमालयी एवं अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में जलवायु जनित आपदाओं से निपटने के लिए तत्काल संसदीय कदम उठाने पर जोर दिया गया।







अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव अब गंभीर वैश्विक चुनौती बन चुके हैं। चरम मौसमी घटनाएं, जैव विविधता का नुकसान, खाद्य एवं जल असुरक्षा तथा स्वास्थ्य संबंधी बढ़ते खतरे विकासशील देशों और कमजोर समुदायों को असमान रूप से प्रभावित कर रहे हैं। भारत जैसे देशों के लिए जलवायु अनुकूलन केवल पर्यावरण संरक्षण का विषय नहीं, बल्कि सतत विकास की अनिवार्य आवश्यकता है।


उन्होंने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा अभिसमय (यूएनएफसीसीसी) और पेरिस समझौते के तहत विकसित देशों द्वारा जलवायु वित्त उपलब्ध कराना उनका दायित्व है, न कि कोई दान या परोपकार। उन्होंने कहा कि इन प्रतिबद्धताओं को पूरा करना बहुपक्षीय संस्थाओं में विश्वास बनाए रखने और विकासशील देशों को सतत विकास लक्ष्यों के साथ जलवायु कार्रवाई आगे बढ़ाने में सक्षम बनाने के लिए आवश्यक है।




वैश्विक अनुकूलन आयोग के आकलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि जलवायु अनुकूलन उपायों में लगभग 1.8 ट्रिलियन डॉलर का निवेश करीब 7.1 ट्रिलियन डॉलर के लाभ उत्पन्न कर सकता है। उन्होंने प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों, आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे, कृषि और जल संसाधन प्रबंधन में निवेश को महत्वपूर्ण बताया।


हिमाचल प्रदेश से पांचवीं बार सांसद निर्वाचित होने के अपने अनुभव साझा करते हुए ठाकुर ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र बार-बार प्राकृतिक आपदाओं और जलवायु संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। भारत ने राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना, इसके नौ राष्ट्रीय मिशनों और राज्य स्तरीय जलवायु कार्ययोजनाओं के माध्यम से शमन, अनुकूलन तथा आपदा जोखिम न्यूनीकरण को एकीकृत दृष्टिकोण से आगे बढ़ाया है।
उन्होंने सांसदों से विधायी निगरानी, सरकारी जवाबदेही और पारदर्शी रिपोर्टिंग के माध्यम से जलवायु अनुकूलन को मजबूत करने का आह्वान किया। साथ ही, राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान लक्ष्यों के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देते हुए उन्होंने वर्तमान और भावी पीढ़ियों के लिए अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और न्यायसंगत भविष्य बनाने हेतु वैश्विक सहयोग की अपील की।





