मृत्यु के कारणों की पहचान एवं आंकड़ों के संकलन को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित

 

हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली द्वारा आज फ़ूड प्लाजा समीप सीएमओ कार्यालय हमीरपुर में मृत्यु के कारणों की पहचान एवं उनके सही आंकड़ों के संकलन को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला का शुभारंभ जिला स्वास्थ्य अधिकारी हमीरपुर डॉ. अजय अत्री ने किया।

इस अवसर पर डॉ. अभिलाष सूद प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, सामुदायिक चिकित्सा विभाग डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय हमीरपुर, डॉ. नेहा पटियाल जिला कार्यक्रम अधिकारी तथा सुनील कुमार जन शिक्षा एवं सम्प्रेषण अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

 

एम्स, नई दिल्ली की ओर से सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए डॉ. अनमोल दौलत, डॉ. आकांक्षा वर्मा एवं आशीष सिंह द्वारा विस्तारपूर्वक जानकारी दी।

 

इस अवसर पर डॉ. अनमोल दौलत ने बताया कि यह परियोजना देश के 18 राज्यों में संचालित की जा रही है। इसके अंतर्गत प्रत्येक राज्य से एक जिले का चयन किया गया है।

 

 

हिमाचल प्रदेश में इस परियोजना के लिए जिला हमीरपुर का चयन किया गया है। उन्होंने बताया कि परियोजना के तहत विभिन्न कारणों से होने वाली मृत्यु से संबंधित जानकारी दिगित्व ऐप में दर्ज की जाएगी।

 

इस कार्य के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा तैयार किए गए निर्धारित टूल्स का उपयोग किया जाएगा। डॉ. आकांक्षा वर्मा ने सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को वर्बल ऑटोप्सी (Verbal Autopsy) की प्रक्रिया के बारे में विस्तारपूर्वक समझाया।

उन्होंने बताया कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के कुछ दिनों बाद संबंधित सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी मृतक के परिवार के घर जाकर परिजनों से मृत्यु से पहले दिखाई देने वाले लक्षणों, बीमारी तथा अन्य स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों के बारे में आवश्यक जानकारी एकत्रित करेंगे।

 

 

इस जानकारी के आधार पर मृत्यु के संभावित कारणों का विवरण दिगित्व ऐप में दर्ज किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य समुदाय स्तर पर मृत्यु के कारणों से संबंधित विश्वसनीय आंकड़े एकत्रित करना तथा उनका विश्लेषण एवं शोध करना है।

 

इससे यह पता लगाने में सहायता मिलेगी कि जिले के किस क्षेत्र में किन बीमारियों या स्वास्थ्य संबंधी कारणों से अधिक मृत्यु हो रही हैं।

 

इन आंकड़ों के वैज्ञानिक विश्लेषण से क्षेत्र विशेष में प्रमुख स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान करने तथा भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं एवं योजनाओं को और अधिक प्रभावी ढंग से तैयार करने में मदद मिलेगी।

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