



रूपनगर/विवेकानंद वशिष्ठ:- पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री एवं हमीरपुर लोकसभा सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने 3 नवंबर 2026 को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रोपड़ में आयोजित INNOpreneur 2026 कार्यक्रम को संबोधित किया।

स्टार्टअप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की प्रगति को बताया आत्मनिर्भर और समावेशी विकास का आधार




विकसित भारत 2047 के लिए अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता को आगे बढ़ाने की थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने भारत की तकनीकी क्षमताओं, स्टार्टअप इकोसिस्टम और भविष्य की रणनीतिक प्राथमिकताओं पर विचार रखे।







अनुराग ठाकुर ने आईआईटी रोपड़ की 18 वर्षों की यात्रा की सराहना करते हुए 2019 की बाढ़ के बाद संस्थान द्वारा पुनर्निर्माण और आत्मनिर्भरता की दिशा में किए गए प्रयासों का उल्लेख किया।




उन्होंने निदेशक राजीव आहूजा के नेतृत्व में विकसित हो रहे नवाचार एवं उद्यमिता के वातावरण को भी रेखांकित किया।





संस्थान से जुड़े 600 से अधिक स्टार्टअप, कृषि क्षेत्र में NanoKriti Nanobubble Technologies और ANNAM.AI Centre of Excellence जैसी पहलों को उन्होंने अनुसंधान के व्यावहारिक उपयोग के उदाहरण बताया। साथ ही, भारतीय सेना के सहयोग से ड्रोन एवं स्वायत्त प्रणालियों पर काम कर रहे Centre of Drones and Autonomous Systems (CoDRAS) के योगदान का उल्लेख किया।


उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। उनके अनुसार, देश में मान्यता प्राप्त स्टार्टअप की संख्या 2014 के 354 से बढ़कर 2.23 लाख से अधिक हो गई है, जबकि इनसे 23.36 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं।
इसी अवधि में यूनिकॉर्न की संख्या चार से बढ़कर 131 हुई है। ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत की रैंकिंग 2015 के 81वें स्थान से सुधरकर 2025 में 38वें स्थान पर पहुंची है।
अनुराग ठाकुर ने तकनीक के लोकतंत्रीकरण को समावेशी विकास की अनिवार्य शर्त बताते हुए JAM त्रिमूर्ति का उदाहरण दिया।
उन्होंने 2030 तक भारत को वैश्विक AI नवाचार केंद्र बनाने के लक्ष्य के तहत दो करोड़ से अधिक विद्यार्थियों एवं पेशेवरों को AI की बुनियादी शिक्षा और एक करोड़ लोगों को उन्नत डेटा इंजीनियरिंग कौशल प्रदान करने की योजना का उल्लेख किया।

सेमीकंडक्टर क्षेत्र में ₹1,27,500 करोड़ के प्रावधान और स्वदेशी विक्रम 32-बिट प्रोसेसर का उल्लेख करते हुए उन्होंने तकनीकी संस्थानों से केवल शिक्षा तक सीमित न रहकर उद्यमिता, पेटेंट और उत्पाद विकास के केंद्र बनने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि युवाओं के नवाचार और अनुसंधान को जनसामान्य तक पहुंचाने वाली तकनीकों में बदलना ही 2047 तक विकसित, सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।




