76वें वन महोत्सव में विधायक इन्द्रदत्त लखनपाल का हरित संकल्प 

हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ  :-   बड़सर विधानसभा क्षेत्र के घुमारली में वन विभाग द्वारा आयोजित 76वें वन महोत्सव का आयोजन बड़े उत्साह और उमंग के साथ किया गया।
घुमारली में किया पौधारोपण, जनता से पर्यावरण संरक्षण का आह्वान
 इस अवसर पर बड़सर के लोकप्रिय एवं जनप्रिय विधायक इन्द्रदत्त लखनपाल ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की और पौधारोपण कर हरियाली एवं पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश दिया।
विधायक इन्द्रदत्त लखनपाल ने अपने संबोधन में कहा कि वन महोत्सव केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, हरित और स्वस्थ पर्यावरण का संकल्प है। उन्होंने कहा – “प्रकृति के बिना मानव जीवन अधूरा है।
यदि हम आज वृक्ष नहीं लगाएंगे, तो आने वाले वर्षों में स्वच्छ हवा, शुद्ध जल और प्राकृतिक संसाधनों का संकट गहराएगा। एक पौधा लगाना सिर्फ पेड़ उगाना नहीं, बल्कि भविष्य को जीवन देना है।”
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और बढ़ते प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याओं का सबसे सरल और प्रभावी समाधान पौधारोपण है। उन्होंने हर नागरिक से वर्ष में कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी नियमित देखभाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि “हमारे द्वारा लगाए गए पौधों की सुरक्षा और संवर्धन करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना उन्हें रोपना।”
विधायक लखनपाल ने वन विभाग के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि विभाग द्वारा चलाए जा रहे अभियान में जनता की भागीदारी ही इसकी सफलता की कुंजी है। उन्होंने बड़सर विधानसभा क्षेत्र में बड़े स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाने की घोषणा भी की, ताकि यह क्षेत्र हरियाली और स्वच्छता का आदर्श उदाहरण बन सके।
इस अवसर पर मण्डल उपाध्यक्ष नीरज शर्मा एवं संजय बन्याल, मण्डल महामंत्री दिनेश व्यास, मण्डल कोषाध्यक्ष सुरेंद्र अग्निहोत्री, बूथ अध्यक्ष बी.डी. शर्मा, मिलाप चन्द, अनुराग, रजत, राहुल सहित अनेक कार्यकर्ता एवं स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
कार्यक्रम में वन्य अधिकारी एवं विभाग के कर्मचारी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने उपस्थित लोगों को पौधारोपण, वन संरक्षण और जैव विविधता के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी तथा सभी को इस अभियान में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अंत में विधायक इन्द्रदत्त लखनपाल ने सभी उपस्थित जनों का धन्यवाद करते हुए कहा कि “पेड़ केवल ऑक्सीजन के स्रोत नहीं, बल्कि हमारे जीवन के रक्षक हैं। अगर हम प्रकृति को संजोकर रखेंगे, तो प्रकृति भी हमें जीवन देती रहेगी।”
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