




हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ :- भाजपा जिला हमीरपुर ने आज भोरंज विधानसभा के टाउन भराड़ी ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर 14-अगस्त-1947 की कहानियों को याद किया, जो आज भी भारत के इतिहास में एक गहरे जख्म की तरह ताज़ा हैं।
भोरंज विधानसभा के टाउन भराड़ी में मनाया विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस




कार्यकर्म की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष राकेश ठाकुर ने की और संसदीय क्षेत्र के प्रभारी अमित शर्मा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा भोरंज विधानसभा से पूर्व में विधायक रहीं कमलेश कुमारी व डॉ. अनिल धीमान के साथ-साथ जिला के पूर्व अध्यक्ष देसराज शर्मा, और जिला के दोनों महामंत्री अजय रिंटू व राजेश सहगल भी मौजूद रहे।








कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राकेश ठाकुर ने कहा कि 15-अगस्त-1947 को देश को आजादी मिली, लेकिन इसके एक दिन पहले यानी 14-अगस्त-1947 को देश का सबसे गहरा दर्द मिला, जिसकी लाखों कहानियां आज भी भारत के इतिहास में एक गहरे जख्म की तरह शामिल हैं।





उन्होने कहा कि मुगलों और अंग्रेजो की 400 साल से अधिक की गुलामी के बाद देश को आजादी के रूप में एक बड़ी खुशी तो मिली, लेकिन इसके साथ ही बंटवारे का दर्द भी मिला, जिसके बाद भारत और पाकिस्तान के रूप में 2 देशों का जन्म हुआ।

ये बंटवारा लाखों लोगों के विस्थापन, हिंसा और अपनों को खोने के दुख की कीमत पर हुआ। बंटवारे की वजह से घर-बार तो छूटे, और साथ ही अनगिनत जिंदगियां भी तबाह हो गईं। यह विभीषिका केवल भौगोलिक सीमाओं का बंटवारा नहीं थी, बल्कि दिलों और भावनाओं का भी टूटना था।


राकेश ठाकुर ने बताया कि आंकड़ों के अनुसार विभाजन के दौरान करीब 10 लाख लोग मारे गए, 1.46 करोड़ लोग बेघर हुए और 50 हजार महिलाओं को बलात्कार का शिकार होना पड़ा। उन्होंने कहा कि बंटवारे की शर्त पर ही उस समय के कमजोर नेतृत्व ने भारत को अंग्रेजों से आजादी दिलाई थी।
वहीं संसदीय प्रभारी अमित शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि भारत का विभाजन हुए एक लंबा अरसा गुजर गया है, पर अब भी हमारे आसपास ऐसे तमाम लोग मौजूद हैं, जिन्होंने उस दौर में हुए दंगों में अपनों को खोया। उन्होंने कहा कि मोहम्मद अली जिन्ना 07 अगस्त,1947 को दिल्ली से कराची के लिए रवाना हो रहे थे। उनके साथ उनकी बहन फातिमा जिन्ना भी थीं। तब यहां पहाड़गंज, करोल बाग, किशनगंज, सब्जी मंडी आदि में सांप्रदायिक दंगे भड़के हुए थे, पर मजाल है कि उन्होंने दिल्ली को हमेशा-हमेशा के लिए छोड़ने से पहले एक बार भी दंगाग्रस्त क्षेत्रों में जाकर शांति बहाली की जरूरत महसूस की हो।
पूर्व विधायकों, कमलेश कुमारी और डॉ. अनिल धीमान ने भी 14-अगस्त-1947 के ज़ख्मों को याद करते हुए कहा कि यह दुखी करने वाला दिन था, जो आज भी याद आने पर आत्मा को झकझोर देता है। इस काले अध्याय की भयावह स्मृतियों को आम जनता तक पहुंचाने का काम भारतीय जनता पार्टी करेगी। दोनों नेताओं ने कहा कि यह सिर्फ भू-भाग का बंटवारा नहीं था। एकाएक बता दिया गया कि पाकिस्तान से घर-बार छोड़कर जाना पड़ेगा। उस पीड़ा को समझ पाना बहुत ही मुश्किल है कि किस तरह वहां से गैर-मुस्लिम समाज के लोगों को जिस अवस्था में थे, उसी में निकलना पड़ा। उस वक्त बहन-बेटियों के साथ जो हुआ, वह आज याद करते ही आत्मा रो पड़ती है। आम नागरिकों को यह इतिहास बताने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जो लोग अपने घरों में समृद्ध जीवन जी रहे थे, वे अपने सपने छोड़कर हिंदुस्तान आए और एक ही दिन में शरणार्थी बन गए।



