प्रो. प्रेम कुमार धूमल से प्रसिद्ध साहित्यकार यशपाल के पुत्र आनंद यशपाल की भेंट

हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ :- प्रसिद्ध क्रांतिकारी-साहित्यकार यशपाल के सुपुत्र आनंद यशपाल, जो लंबे समय से अमेरिका में निवासरत हैं, अपने भारत दौरे के दौरान पिछले कल समीरपुर में पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल से मिले। इस अवसर पर दोनों ने साहित्य, इतिहास और यशपाल जी की साहित्यिक व क्रांतिकारी विरासत पर गहन चर्चा की।

प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने साहित्यकार यशपाल को याद करते हुए कहा कि वे हिन्दी साहित्य के विशिष्ट स्तम्भ, एक क्रांतिकारी युवा, समाजवादी विचारक और विस्तृत विधाओं में लेखन करने वाले लेखक थे। उन्हें साहित्य जगत में उनके योगदान के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।

 

प्रो. धूमल ने कहा कि उनके साहित्य का वैश्विक पाठक-वर्ग तक पहुँचाना और भाषा की सीमा पार करना उनके सुपुत्र आनंद यशपाल की महत्वपूर्ण पहल रही है।

 

 

आनंद ने अपने पिता के अंग्रेज़ी में अनूदित संस्करणों और सम्पादन कार्यों के माध्यम से यशपाल की कहानियाँ व उपन्यास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किए, जिसमें This Is Not That Dawn (“झूठा सच” का अनुवाद) का प्रकाशन भी शामिल है।

 

कल हुई भेंट के दौरान प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने यशपाल को न केवल एक महत्त्वपूर्ण साहित्यकार के रूप में बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम और समाज-सुधार के तारक के रूप में याद किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यशपाल ने साहित्य के जरिये जाति, धार्मिक रंजिश और सामाजिक असमानताओं पर साहसिक दृष्टि प्रस्तुत की और आने वाली पीढ़ियों के लिए वे एक अमूल्य प्रेरणा स्रोत हैं।

 

आनंद यशपाल ने इस मौके पर कहा कि वे अपने पिता की याद और साहित्यिक विरासत को संजो कर रखने के लिए निरन्तर प्रयासरत रहेंगे और भारत में साहित्यिक विमर्श को प्रोत्साहित करने के लिये आगे भी सक्रिय रहेंगे। उन्होंने प्रो. धूमल के सहयोग और सम्मान के लिये धन्यवाद प्रकट किया।

 

 

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