ऑनलाइनमध्य काउंसलिंग कराने में असमर्थ है हिमाचल का तकनीकी विश्वविद्यालय इसे तकनीकी के विकास का अंदाजा लगाया जा सकता है -कृष कान्हा

हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ :- अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य कृष कान्हा ने हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय की बदहाल व्यवस्था पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश का एकमात्र तकनीकी विश्वविद्यालय आज अस्तित्व बचाने की स्थिति में खड़ा है। तकनीकी शिक्षा का केंद्र होने के बावजूद विश्वविद्यालय में व्यवस्थाओं की हालत बेहद दयनीय है, जिसे प्रदेश सरकार लगातार अनदेखा कर रही है।

 

 

 

 

कृष कान्हा ने कहा कि विश्वविद्यालय में स्थाई कुलपति की नियुक्ति आज तक नहीं हो पाई है, जिससे अकादमिक और प्रशासनिक कामकाज लगातार प्रभावित हो रहा है। वहीं स्थाई प्राध्यापकों की नियुक्ति भी वर्षों से लंबित है, जिसके कारण छात्रों की पढ़ाई अधर में लटक रही है।

 

स्थिति यह है कि अगर अतिथि शिक्षक बीच में सेशन छोड़ दे, तो पूरे वर्ष छात्र विषय शिक्षक तक से वंचित रह जाते हैं—यह तकनीकी शिक्षा के भविष्य से खिलवाड़ है।

 

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय पूरी तरह सेल्फ फाइनेंस मॉडल पर चल रहा है, जहां प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार कोई वित्तीय सहयोग नहीं दे रहे। यह मॉडल तकनीकी विश्वविद्यालय जैसे महत्वपूर्ण संस्थान के लिए बिल्कुल भी उपयुक्त नहीं है।

 

सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि तकनीकी विश्वविद्यालय होने के बावजूद प्रैक्टिकल क्लासेस नियमित रूप से नहीं लग पा रही हैं। इतना ही नहीं, विश्वविद्यालय तकनीकी संसाधनों का उपयोग करके ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से एडमिशन तक संचालित नहीं कर पा रहा। यह स्थिति सरकार की लापरवाही को दर्शाती है।

 

अभाविप की पुरजोर मांग पर विश्वविद्यालय परिसर में कैंटीन का निर्माण तो हो चुका है, लेकिन प्रशासन आज तक उसका शुभारंभ नहीं कर पाया, जिससे छात्र अब भी सुविधाओं से वंचित हैं।

 

कृष कान्हा ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने विश्वविद्यालय की अनदेखी बंद नहीं की, स्थाई नियुक्तियाँ नहीं कीं और बुनियादी सुविधाएँ नहीं सुधारीं, तो विद्यार्थी परिषद व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होगी।

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