तीन साल बेमिसाल आखिर किस बात के: सोम दत्त 

हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ  :-   हिमाचल की सुखविंदर सरकार जहां “तीन साल बेमिसाल” के नाम पर जश्न मना रही है, वहीं प्रदेश की जनता पूछ रही है कि आखिर यह “बेमिसाल” किस बात के हैं—

बंद पड़ी योजनाओं के?

रोकी गई पेंशनों के?

या फिर टूटे हुए वादों के?

सच यही है कि सुख की सरकार ने जनता को सुख नहीं, केवल दुख दिया है।

पिछली बीजेपी की जयराम सरकार द्वारा शुरू की गई सहारा योजना पिछले 6 महीने से बंद पड़ी है।

हजारों गंभीर बीमार मरीजों का इलाज अधर में लटक गया है, लेकिन सरकार की संवेदनहीनता का यह आलम है कि न कोई व्यवस्था की जा रही है, न कोई जवाब दिया जा रहा है।

कैंसर, किडनी फेलियर, पैरालिसिस, हीमोफीलिया और थैलेसीमिया जैसे रोगों से जूझ रहे मरीज दवाइयों के बिना तड़प रहे हैं,

और दूसरी तरफ सरकार अपने जश्न और प्रचार में मग्न है।

पिछली सरकार की हिम केयर सहित अनेकों जनकल्याणकारी योजनाएं, जो गरीब और पीड़ित परिवारों के लिए जीवनदान थीं,

उन्हें भी यह सरकार चलाने में पूरी तरह विफल रही है।

आपदा के समय भी सरकार नदारद रही

मंडी की भयावह आपदा में जब लोगों का घर-परिवार उजड़ गया, तब इस सरकार और उसके मंत्रियों को मौके पर पहुंचने तक की फुर्सत नहीं मिली।

आज तक कई प्रभावित अपने हक़ की राहत के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।

सरकार की गारंटियां निकली पूरी तरह खोखली — एक भी वादा पूरा नहीं हुआ

जनता को बड़े-बड़े सपने दिखाकर सत्ता में आई सरकार आज तक किसी एक गारंटी पर भी खरी नहीं उतरी है।

उल्टा करोड़ों रुपये विज्ञापनों पर खर्च करके अपनी नीतियों का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, जबकि—

जिनकी पेंशन जीवन का सहारा थी, उनसे वही छीन लिया गया

जिनकी दवाइयों पर जीवन निर्भर था, उन्हें अधर में छोड़ दिया गया

दिव्यांगों, गंभीर बीमारों और गरीब परिवारों की पूरी तरह अनदेखी कर दी गई

क्या यही है इस सरकार का तीन साल का ‘बेमिसाल’ मॉडल?

दरअसल ये बेमिसाल नहीं, बदहाली के तीन साल हैं —

तीन साल हिमाचल को डुबोने के

हमारी मांगें

1. सहारा योजना को तत्काल बहाल किया जाए

2. 6 महीने से लंबित सभी भुगतान तुरंत जारी किए जाएं

3. गंभीर बीमार, दिव्यांग और गरीब परिवारों पर हो रहा अन्याय तुरंत रोका जाए

जनता सब देख रही है।

वक्त आने पर जवाब भी देगी।

 

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