




हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- हिमाचल प्रदेश में प्रस्तावित प्रीपेड स्मार्ट मीटर योजना के खिलाफ जनआक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। यह मुद्दा अब केवल आशंकाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पड़ोसी राज्यों के अनुभवों के चलते जनता का विरोध और अधिक मजबूत हो गया है।
मेहरे मार्केट, बिझड़ी व चकमोह में कड़ा आक्रोश, पंजाब के अनुभव ने बढ़ाई जनता की चिंता

बड़सर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत मेहरे मार्केट, बिझड़ी और चकमोह जैसे प्रमुख बाजारों में व्यापारियों, उपभोक्ताओं और आम नागरिकों द्वारा स्मार्ट मीटरों के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह योजना तकनीकी सुधार के नाम पर आम जनता पर भारी आर्थिक बोझ डालने की तैयारी है। पड़ोसी राज्य पंजाब में लगाए गए प्रीपेड स्मार्ट मीटरों के बाद उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है।
कई मामलों में बिल पहले की तुलना में 4 से 10 गुना तक बढ़ गए, जिससे आम परिवारों और छोटे व्यापारियों की कमर टूट गई।
पंजाब में हालात इतने बिगड़ गए कि जनता को मजबूर होकर स्मार्ट मीटर उखाड़ने पड़े और जगह-जगह इन मीटरों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए। वहां की जनता ने खुलकर इन मीटरों पर आपत्ति जताई और सरकार से इस व्यवस्था को वापस लेने की मांग की।
अब वही अनुभव हिमाचल की जनता के सामने उदाहरण बनकर खड़ा है, जिसके चलते लोग पहले से ही इस योजना को अस्वीकार कर रहे हैं।
विरोध कर रहे नागरिकों का कहना है कि हिमाचल प्रदेश बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ अन्य राज्यों को भी बिजली उपलब्ध करवाता है।
ऐसे प्रदेश में यदि आम जनता को मोबाइल रिचार्ज की तरह बिजली उपयोग करने पर मजबूर किया गया, तो यह गरीब, बुजुर्ग और ग्रामीण उपभोक्ताओं के साथ सीधा अन्याय होगा।
“पैसे खत्म तो बिजली बंद” जैसी व्यवस्था मानवीय और सामाजिक दृष्टि से भी पूरी तरह गलत है।
जनता का यह भी आरोप है कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर योजना को बिना जनसंवाद, बिना पारदर्शिता और बिना जनता की सहमति के लागू करने की कोशिश की जा रही है। न तो इसके तथाकथित लाभों को स्पष्ट किया गया है और न ही भविष्य में बढ़ने वाले खर्चों की सच्चाई जनता के सामने रखी गई है। साथ ही स्मार्ट मीटरों की खरीद और ठेकों को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं, जिन पर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
बाजारों में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान व्यापार मंडलों और सामाजिक संगठनों ने सरकार से साफ शब्दों में मांग की है कि हिमाचल प्रदेश में प्रीपेड स्मार्ट मीटर योजना को तुरंत रोका जाए। जब तक सभी पक्षों से खुली चर्चा कर जनता का भरोसा नहीं लिया जाता, तब तक इस तरह के फैसले प्रदेश पर नहीं थोपे जाने चाहिए।
यदि सरकार ने जनता की आवाज़ को अनसुना किया, तो आने वाले समय में यह विरोध आंदोलन और अधिक व्यापक रूप ले सकता है।


















