




हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- भाजपा प्रदेश महिला मोर्चा महामंत्री एवं भोरंज विधानसभा क्षेत्र की पूर्व विधायक कमलेश कुमारी ने राज्य सरकार द्वारा सेवानिवृत्त पटवारियों, कानूनगो और तहसीलदारों की दोबारा नियुक्ति के निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताई है।










उन्होंने इस फैसले को प्रदेश के बेरोजगार युवाओं के साथ अन्याय करार देते हुए सरकार की मंशा और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।



कमलेश कुमारी ने कहा कि एक ओर प्रदेश का पढ़ा-लिखा युवा सरकारी नौकरियों की प्रतीक्षा में सड़कों पर संघर्ष कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार लाखों रुपये के वेतन पर रिटायर्ड कर्मचारियों को पुनर्नियुक्त कर रही है।


उन्होंने कहा कि सरकार स्पष्ट करे कि आखिर ऐसी क्या आवश्यकता आन पड़ी कि नई पीढ़ी को अवसर देने के बजाय सेवानिवृत्त अधिकारियों को वापस बुलाया जा रहा है।


उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पटवारी भर्ती प्रक्रिया और परिणाम घोषित करने में अनावश्यक देरी कर रही है तथा अपनी प्रशासनिक कमी को छुपाने के लिए पुराने कर्मचारियों का सहारा ले रही है। उनके अनुसार यदि समय रहते नियमित भर्तियां की गई होतीं, तो आज यह स्थिति उत्पन्न न होती।
पूर्व विधायक ने इसे सरकार की प्रशासनिक विफलता बताते हुए कहा कि क्या सरकार के पास नई पीढ़ी को प्रशिक्षित करने और उन्हें अवसर देने का कोई स्पष्ट विजन नहीं है? प्रदेश में लाखों युवा बेरोजगार हैं, ऐसे में रिटायर्ड अधिकारियों को प्रमोशन और पुनर्नियुक्ति देना युवाओं के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।
कमलेश कुमारी ने भोरंज विधानसभा क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग (PWD) और जल शक्ति विभाग में सेवानिवृत्त अधिकारियों को दिए जा रहे सेवा विस्तार पर भी कड़ा विरोध जताया।
उन्होंने कहा कि XEN स्तर के अधिकारियों को सेवानिवृत्ति के बाद भी पदों पर बनाए रखना उन जूनियर अधिकारियों के साथ अन्याय है, जो वर्षों से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सक्षम और योग्य अधिकारी जब कतार में खड़े हैं, तब सेवा विस्तार देकर चहेतों को लाभ पहुंचाना प्रशासनिक मर्यादाओं का उल्लंघन है। लंबे समय तक एक ही पद पर जमे रहने से विभागीय जवाबदेही प्रभावित होती है और पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगता है।
पूर्व विधायक ने मांग की कि आयु पूरी कर चुके सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त किया जाए तथा रिक्त पदों पर पात्र और ऊर्जावान अधिकारियों की नियुक्ति की जाए, ताकि विकास कार्यों में पारदर्शिता और गति सुनिश्चित हो सके।
सरकार को चहेतों को उपकृत करने की नीति त्यागकर योग्यता और पारदर्शिता को प्राथमिकता देनी चाहिए।



