




कुल्लू/हमीरपुर:- राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) हमीरपुर, जो उन्नत भारत अभियान के क्षेत्रीय समन्वय संस्थान के रूप में कार्यरत है, द्वारा 20 से 22 मार्च 2026 तक ऋषि भूमि, साधना धाम, नग्गर (कुल्लू) में नव्या शोधार्थी सम्मेलन 2026 का सफल आयोजन किया गया।

यह आयोजन शैक्षणिक अनुसंधान को जमीनी वास्तविकताओं से जोड़ने तथा ग्रामीण एवं सतत क्षेत्रीय विकास के लिए ठोस समाधान विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ।

तीन दिवसीय इस आयोजन में NIT हमीरपुर, IIT मंडी, केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय सहित विभिन्न प्रमुख संस्थानों के 60 से अधिक शोधार्थियों एवं उन्नत भारत अभियान से जुड़े संकाय सदस्यों ने सहभागिता की। यह मंच अंतर्विषयक सहयोग, ज्ञान-विनिमय और प्रभावी शोध विचारों के सह-निर्माण का सशक्त माध्यम बना।
कार्यक्रम का मुख्य फोकस स्थानीय एवं क्षेत्रीय चुनौतियों के समाधान पर रहा, जिसमें वास्तविक समस्याओं को क्रियान्वयन योग्य अनुसंधान में परिवर्तित करने पर बल दिया गया। प्रतिभागियों ने नीतिगत नवाचार, तकनीकी हस्तक्षेप और स्केलेबल उत्पाद-आधारित मॉडल के माध्यम से समाधान विकसित किए।
इस पहल ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने, पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को बढ़ावा देने तथा सतत विकास को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया।
इस आयोजन का एक प्रमुख परिणाम जमीनी आवश्यकताओं के अनुरूप व्यावहारिक एवं अनुसंधान-आधारित समाधानों का विकास रहा। प्रतिभागियों ने नीति हस्तक्षेप, तकनीकी एकीकरण तथा सामुदायिक सहभागिता पर आधारित रणनीतियाँ प्रस्तुत कीं।
इन संवादों ने न केवल अकादमिक दृष्टिकोण को समृद्ध किया बल्कि संस्थागत सहयोग को भी मजबूत किया, जिससे ग्रामीण चुनौतियाँ शोध एजेंडा के केंद्र में स्थापित हुईं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्नत भारत अभियान के क्षेत्रीय समन्वयक डॉ. चंद्र प्रकाश ने कहा:
“नव्या केवल एक शोध मंच नहीं, बल्कि जमीनी चुनौतियों को स्केलेबल एवं सतत समाधानों में परिवर्तित करने का उत्प्रेरक है।
यह अकादमिक जगत और समाज के बीच की दूरी को पाटते हुए शोध को ग्रामीण विकास एवं साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण से जोड़ने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”
कार्यक्रम में रामकृष्ण मिशन आश्रम, शिमला के स्वामी तनमयानंद जी ने योग, भारतीय दर्शन और ध्यान पर सत्र लेते हुए शोध के साथ समग्र विकास के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने “तप” और “व्रत” के महत्व को रेखांकित करते हुए शोधार्थियों को उत्कृष्टता प्राप्त करने हेतु आंतरिक अनुशासन अपनाने का संदेश दिया।
सिस्टर निवेदिता के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ गहन समझ और जागरूकता ही वास्तविक ज्ञान का आधार है।
IIT मंडी के प्रो. अतुल धर ने अंतर्विषयक शोध की आवश्यकता पर बल देते हुए शोध को नीति, विचार, समाधान और उत्पाद के बीच सेतु बनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने तकनीक, उत्पाद, समाज और वितरण—इन चार स्तंभों पर आधारित समग्र दृष्टिकोण को अपनाने का आह्वान किया, जिससे शोध अधिक प्रभावशाली और उपयोगी बन सके।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुभवात्मक अधिगम के अंतर्गत प्रतिभागियों ने नग्गर कैसल, गौरी शंकर मंदिर, मुरलीधर कृष्ण मंदिर एवं त्रिपुरा सुंदरी मंदिर जैसे सांस्कृतिक स्थलों का भ्रमण किया, जिससे उन्हें क्षेत्र की समृद्ध विरासत और स्थानीय संदर्भों की गहन समझ प्राप्त हुई।
कार्यक्रम के दौरान शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के शहादत दिवस की 95वीं वर्षगांठ पर प्रतिभागियों ने स्थानीय महिला मंडल के साथ मिलकर वृक्षारोपण किया। यह पहल पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत के प्रति सम्मान का प्रतीक बनी।
यह आयोजन सतत आजीविका, स्थानीय उद्यम विकास और समावेशी आर्थिक वृद्धि पर केंद्रित एक दूरदर्शी शोध एजेंडा तैयार करने में भी महत्वपूर्ण साबित हुआ। अकादमिक और सामाजिक सहयोग के माध्यम से इस कार्यक्रम ने शोध को वास्तविक प्रभाव में परिवर्तित करने की मजबूत नींव रखी।
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि शोधार्थी सैद्धांतिक सीमाओं से आगे बढ़कर सामुदायिक विकास और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
नव्या शोधार्थी सम्मेलन 2026 ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि शोध सतत, समावेशी और परिवर्तनकारी विकास का एक सशक्त माध्यम है।


















