गांधी चौक है हमीरपुर शहर की शान 

हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ  :-   जिला मुख्यालय यह हमीरपुर का रूप ऐतिहासिक शहर
गांधी चौक चौक वर्षों से छोटे से बड़े समाजिक, धार्मिक और राजनैतिक आयोजनों का गवाह रहा है, आज अपनी नई काया पाकर जगमगाता हुआ नजर आ रहा है।
वो गांधी चौक जो जिसने यहां आने वाले अन्जान लोगों को हमीरपुर शहर का पता बताया है।
18 वर्षों बाद 45 दिनों में संवारा गया ऐतिहासिक स्थल, मरम्मत कार्य पर खर्च हुए 20 लाख, नया लुक देख सब खुश
उसका रंग-रूप बदला-बदला सा नजर आ रहा है। समय-समय पर इसके जीर्णोद्धार की मांग उठती रही और कई बार इसके मुरम्मत कार्य हुए भी। लेकिन पहली बार शहर का यह मुख्य साइन प्वाइंट ऐसे रंग- रूप में नजर आया है। गुरुवार को शहर का यह मुख्य स्थल गांधी चौक नए रंग रूप में लोगों को समर्पित कर दिया गया। नगर परिषद हमीरपुर द्वारा पिछले करीब 45 दिनों से गांधी चौक के चलाए गए जीर्णोद्धार और सौंदर्याकरण के कार्य को कारीगिरों ने बुधवार को अंतिम रूप दे दिया।
दिलचस्प बात यह रही कि इस चौक को संवारने का काम डेढ़ महीने से युद्धस्तर पर दिन-रात चलता रहा। बताया जा रहा है कि इस पर 20 लाख से अधिक की राशि खर्च की गई है। इतिहास पर नजर दौड़ाए तो ऐतिहासिक गांधी चौक का उद्घाटन महात्मा गांधी की जयंती पर 2 अक्तूबर 2005 को हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र की विधायिक अनिता वर्मा ने किया था।
गांधी चौक का डिजाइन एनआईटी हमीरपुर द्वारा बनाया गया था, जोकि शहर के लोगों को भी काफी पसंद भी आया था। लेकिन समय के साथ-साथ और बदलते परिवेश के कारण गांधी चौक के जीणोद्धार की मांग पिछले कुछ वर्षों से उठ रही थी। ऐसे में करीब 18 वर्षों बाद इसको दुरुस्त करने का काम शुरू किया गया था। नगर परिषद हमीरपुर ने शहर के व्यस्त चौक होने के बावजूद भी 45 दिनों के अंदर दिन-रात काम करते हुए ऐतिहासिक गांधी चौक को लोगों को समर्पित कर दिया है।
1966 में स्थापित की गई थी गांधी की प्रतिमा
– जानकारों की मानें तो 1966 के आस-पास इस चौक पर गांधी की प्रतिमा – स्थापित की गई थी। बताते हैं कि महात्मा गांधी की प्रतिमा को नौ अगस्त 2000 को कुछ शरारती तत्वों ने तोड़ दिया था, जिस पर काफी हंगामा भी – हुआ था और मामला माननीय न्यायालय तक पहुंचा था।
 मास्टर हरनाम व ज्ञान चंद ने दी थी जमीन
चौक पर गांधी चौक की प्रतिमा स्थापित करने के लिए जमीन मास्टर – हरनाम सिंह ठाकुर और स्वर्गीय ज्ञान चंद पुत्र गुलाबा राम गौड़ा खुर्द वार्ड नंबर दस से ली गई थी। इसके साथ ही हमीरपुर शहर का पुराना बस – अड्डा भी स्थित था। यहां से अड्डा तबदील हो गया और चौक से कुछ दूरी – पर ही मिनी सचिवालय का निर्माण करवाया गया। आज जब गांधी चौक का जीर्णोद्धार हुआ है तो हर कोई मास्टर हरनाम सिंह और स्वर्गीय ज्ञान चंद को याद कर रहा है।
रखरखाव के लिए कर्मचारी की तैनाती
ऐतिहासिक गांधी चौक के रखरखाव के लिए नगर परिषद हमीरपुर ने एक कर्मचारी तैनात कर दिया है। यह गांधी चौक की देखरेख के साथ साफ-सफाई का जिमा भी संभालेगा। गांधी चौक की दीवारों पर अब कोई भी संस्थान पोस्टर या होर्डिंग्स नगर परिषद की अनुमति के बिना नहीं चिपका सकेगा। इसके अलावा गांधी चौक में अगर कोई कार्यक्रम आयोजित करवाता है और गांधी चौक का कोई नुकसान पहुंचता है, तो संबंधित इवेंट मैनेजर से ही इसकी भरपाई की जाएगी।
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