



हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- हिम अकादमी पब्लिक स्कूल, विकास नगर में शिक्षकों के व्यावसायिक विकास एवं शिक्षण कौशल को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से “सकारात्मक व्यवहार सहयोग एवं डिजिटल शिक्षण उपकरणों के माध्यम से शिक्षण पद्धतियों में परिवर्तन” विषय पर एक विशेष प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया।


इस प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को सकारात्मक एवं सहयोगात्मक शिक्षण वातावरण के निर्माण तथा आधुनिक डिजिटल तकनीकों के प्रभावी उपयोग के लिए प्रशिक्षित करना था।




कार्यक्रम का संचालन सुश्री शालिनी साहोत्रा द्वारा किया गया। उन्होंने शिक्षकों को विद्यार्थियों के सकारात्मक व्यवहार को प्रोत्साहित करने की विभिन्न रणनीतियों तथा कक्षा-कक्ष में डिजिटल शिक्षण उपकरणों के प्रभावी उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी।







उन्होंने बताया कि तकनीक आधारित शिक्षण न केवल विद्यार्थियों की रुचि और सहभागिता को बढ़ाता है, बल्कि सीखने की प्रक्रिया को भी अधिक रोचक, सुलभ और प्रभावशाली बनाता है।



इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विद्यालय के 96 शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विभिन्न गतिविधियों, चर्चाओं और व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से प्रतिभागियों ने नवीन शिक्षण तकनीकों एवं व्यवहार प्रबंधन के प्रभावी उपायों को समझा। यह सत्र सभी प्रतिभागियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और उपयोगी सिद्ध हुआ।



इस अवसर पर प्रधानाचार्या (अकादमिक) डॉ. हिमांशु शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि सकारात्मक व्यवहार सहयोग और डिजिटल शिक्षण उपकरण आज की शिक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण अंग हैं।


इनका प्रभावी उपयोग विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
विद्यालय निदेशक इंजी. पंकज लखनपाल ने कहा कि संस्थान सदैव शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण विधियों एवं नवीन तकनीकों से सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि विद्यार्थियों को समयानुकूल और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जा सके।
वहीं उप-प्रधानाचार्य अश्वनी कुमार ने प्रशिक्षण में सभी प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता की सराहना करते हुए उन्हें प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान एवं कौशल को अपनी दैनिक शिक्षण प्रक्रिया में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम हिम अकादमी पब्लिक स्कूल की उत्कृष्ट शिक्षा, नवाचारपूर्ण शिक्षण एवं शिक्षकों के सतत् व्यावसायिक विकास के प्रति प्रतिबद्धता का एक सफल उदाहरण रहा।

विद्यालय भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षकों को नई शैक्षिक चुनौतियों के लिए तैयार करता रहेगा।

















