राज्यसभा चुनाव या लोकतंत्र की हत्या: संदीप सांख्यान

बिलासपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:-  प्रदेश कांग्रेस के पूर्व मीडिया कॉर्डिनेटर संदीप सांख्यान ने कहा है कि राज्यसभा का चुनाव कम और लोकतंत्र की हत्या ज्यादा हो रही है। उन्होंने यह प्रतिक्रिया कांग्रेस पंचायती राज संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष व भौतिक और आत्मिक तौर पर सम्पूर्ण गांधीवादी नेता मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा चुनाव को लेकर दी है।

 

 

संदीप सांख्यान कहा कि लोकतंत्र को हाशिये पर रखने वाला वाकया राज्यसभा चुनाव हिमाचल प्रदेश में साल 2023 में भी घटित हो चुका है।

यह राज्यसभा चुनाव नहीं था बल्कि लोकतंत्र की हत्या थी: संदीप सांख्यान

संदीप सांख्यान ने भाजपा की राजनीति को घेतरे हुए हुए कहा कि चन्द वर्ष पहले लोकतंत्र के सीने पर वार चंडीगढ़ म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के चुनावों में भी हुआ था, साफ उदाहरण आज जनता के सामने है।

भाजपा की राजनीतिक नग्नता से लोकतंत्र लज्जित: संदीप सांख्यान

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस की अधिकृत राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन जिस आधार पर निरस्त किया गया, उसने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संदीप सांख्यान ने कहा कि किसी अदालत के एक सामान्य नोटिस को आधार बनाकर नामांकन खारिज नहीं किया जा सकता। लेकिन सवाल यह है कि क्या देश में हमेशा यही कठोरता और यही मानदंड लागू किए गए हैं? उन्होंने कहा कि अगर “एक देश – एक कानून” क्या सचमुच भाजपा का सिद्धांत है, तो फिर इन सवालों के जवाब भी देश को और आम जनता को मिलने चाहिए।

संदीप सांख्यान ने सवाल खड़े करते हुए कहा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, लेकिन मोदी जी का क्यों नहीं? प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने शुरुआती चुनावी नामांकन पत्रों में अपनी वैवाहिक स्थिति का उल्लेख नहीं किया था, जबकि बाद के चुनावों में उन्होंने स्वयं को विवाहित बताया। यदि नामांकन पत्र में जानकारी छूटना या गलत होना इतनी गंभीर बात है कि उम्मीदवार का नामांकन रद्द हो जाए, तो उस समय क्या कार्रवाई हुई? जनता जानना चाहती है।

संदीप सांख्यान ने कहा कि क्या किसी निर्वाचन अधिकारी की कोई जवाबदेही तय की गई है।

संदीप सांख्यान ने कहा कि भाजपा के वरिष्ठ नेता और भाजपा में मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के मामले में अलग नियम क्यों अपनाए गए? क्योंकि मध्यप्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के खिलाफ पश्चिम बंगाल में दर्ज मामलों और प्राथमिकी दर्ज को लेकर चुनाव के दौरान विवाद उठा था और कांग्रेस ने आपत्ति भी दर्ज कराई थी, फिर भी कैलाश विजयवर्गीय भी नामांकन निरस्त नहीं हुआ। संदीप सांख्यान ने कहा कि यदि पूरी तरह से गांधीवादी नेता मीनाक्षी नटराजन के मामले में तकनीकी त्रुटि इतनी बड़ी है, तो उस पर इतनी कठोरता क्यों नहीं दिखाई गई?

संदीप सांख्यान ने कहा कि भाजपा नेत्री हेमा मालिनी के मामले में क्या कभी जांच हुई। भाजपा सांसद हेमा मालिनी लगातार चुनाव लड़ती रही हैं। क्या उनके नामांकन पत्रों में सभी विवादित तथ्यों की जांच कभी उसी कठोरता से की गई, जैसी आज विपक्षी उम्मीदवारों के मामले में दिखाई जा रही है?

संदीप सांख्यान ने कहा कि ऐसे भाजपा नेताओ के दर्जनों वाकया है जिसमें भाजपा ऐसी दोगली राजनीति करके लोकतंत्र की हत्या करने पर उतारू है। संदीप सांख्यान ने कहा कि आज जनता जानना चाहती है कि भाजपा यह कैसा लोकतंत्र चला रही है।

 

 

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