नशे के विरुद्ध जनआंदोलन की अग्रदूत: लता देवी

हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- जब भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक परिवर्तन और जनभागीदारी आधारित नेतृत्व नई दिशा दे रहा है, तब हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जनपद की ग्राम पंचायत बलोह की सरपंच लता देवी एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभरी हैं।

 

लगातार दूसरी बार निर्वाचित सरपंच के रूप में उन्होंने न केवल ग्रामीण विकास और सुशासन को नई गति दी है, बल्कि नशे के विरुद्ध एक सशक्त जनआंदोलन खड़ा कर समाज को नई चेतना प्रदान की है।

 

एक पारंपरिक ग्रामीण परिवेश से निकलकर सार्वजनिक जीवन में अपनी पहचान बनाने वाली लता देवी ने यह सिद्ध किया है कि यदि इच्छाशक्ति दृढ़ हो तो सामाजिक परिवर्तन संभव है। उनके नेतृत्व की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि उन्होंने विकास को केवल भौतिक संसाधनों तक सीमित न रखकर सामाजिक सुधार को भी उतनी ही प्राथमिकता दी।

 

नशे के विरुद्ध अभूतपूर्व जनजागरण अभियान

ग्रामीण युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को समाज और राष्ट्र के भविष्य के लिए गंभीर खतरा मानते हुए लता देवी ने इसके विरुद्ध एक व्यापक जनजागरण अभियान प्रारंभ किया। यह केवल एक प्रशासनिक पहल नहीं थी, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग को जोड़ने वाला सामुदायिक आंदोलन था।

 

उन्होंने विद्यालयों, युवाओं, अभिभावकों, महिला मंडलों, स्वयंसेवी संस्थाओं, पंचायत प्रतिनिधियों तथा पुलिस प्रशासन को एक मंच पर लाकर नशा उन्मूलन की सामूहिक रणनीति विकसित की।

 

 

जागरूकता रैलियाँ, विद्यालयों में संवाद कार्यक्रम, सामुदायिक बैठकों, परामर्श सत्रों और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से उन्होंने युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया।

 

इस अभियान की विशेषता यह रही कि उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और पुलिस प्रशासन से सक्रिय सहयोग प्राप्त कर ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रमों को गति दी। समुदाय, विद्यालय और कानून-व्यवस्था तंत्र के बीच स्थापित यह समन्वय ग्रामीण स्तर पर नशे के विरुद्ध एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभरा।

 

राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान

 

लता देवी के नशा-मुक्ति अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर तब विशेष पहचान मिली जब देश के प्रतिष्ठित सामाजिक मंच द बेटर इंडिया ने उनकी प्रेरणादायी यात्रा और जनजागरण अभियान को प्रमुखता से प्रकाशित किया।

 

इस लेख में विस्तार से बताया गया कि किस प्रकार एक महिला सरपंच ने समुदाय, विद्यालयों और पुलिस प्रशासन को साथ लेकर नशे के विरुद्ध प्रभावी सामाजिक अभियान चलाया।

 

उनके इस कार्य को विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े नेताओं ने भी सराहा। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पाँच बार लोकसभा सांसद श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने उनके अभियान से संबंधित लेख को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंचों पर साझा किया।

 

 

वहीं हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष एवं वरिष्ठ नेता प्रतिभा सिंह ने भी उनके प्रयासों की प्रशंसा की। यह इस बात का प्रमाण है कि समाजहित में किए गए कार्य राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर सम्मान प्राप्त करते हैं।

 

राष्ट्रीय मंचों पर हिमाचल की आवाज

 

लता देवी ने न केवल अपने पंचायत क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी हिमाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। उन्हें संयुक्त राष्ट्र महिला (UN Women India) द्वारा आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में आमंत्रित किया गया, जहाँ उन्होंने ग्रामीण महिलाओं के नेतृत्व, राजनीतिक सहभागिता और महिला सशक्तिकरण से जुड़े विषयों पर अपने विचार साझा किए।

 

इसके अतिरिक्त, उन्होंने गुणवत्ता परिषद भारत (Quality Council of India) द्वारा आयोजित *सरपंच संवाद* में हिमाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। यह पहल जल शक्ति मंत्रालय और पंचायती राज मंत्रालय के सहयोग से संचालित होती है। यहाँ उन्होंने जनभागीदारी आधारित ग्रामीण विकास और सामाजिक सुधार के अपने अनुभव साझा किए।

 

गणतंत्र दिवस पर विशेष आमंत्रण

 

ग्रामीण विकास, सामाजिक नेतृत्व और जनसेवा में उत्कृष्ट योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें गणतंत्र दिवस समारोह में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया। यह सम्मान रक्षा मंत्रालय तथा पंचायती राज मंत्रालय के माध्यम से प्रदान किया गया, जो उनके कार्यों की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति और सम्मान का प्रतीक है।

 

सम्मान और उपलब्धियाँ

 

लता देवी को नई दिल्ली स्थित संविधान क्लब ऑफ इंडिया में भारतीय लोकतंत्र विद्यालय (Indian School of Democracy) द्वारा प्रतिष्ठित **“जननेत्री पुरस्कार”** से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें जमीनी लोकतंत्र, महिला नेतृत्व और समाज परिवर्तन में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया।

 

एक प्रेरक उदाहरण

 

लता देवी की यात्रा यह सिद्ध करती है कि सशक्त पंचायत नेतृत्व केवल विकास कार्यों तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध भी निर्णायक भूमिका निभा सकता है। नशे के विरुद्ध उनका अभियान इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि यदि समुदाय, प्रशासन और जनप्रतिनिधि मिलकर कार्य करें तो बड़े से बड़ा सामाजिक संकट भी जनआंदोलन के माध्यम से पराजित किया जा सकता है।

 

लगातार दूसरी बार सरपंच निर्वाचित होने के बाद भी उनका लक्ष्य केवल विकास कार्यों का विस्तार नहीं, बल्कि एक स्वस्थ, शिक्षित, जागरूक और नशामुक्त समाज का निर्माण है। उनकी कहानी केवल एक पंचायत की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि उस नए भारत की कहानी है जहाँ जमीनी स्तर का नेतृत्व समाज परिवर्तन का सशक्त माध्यम बन रहा है।

 

 लता देवी:-  प्रधान/सरपंच, ग्राम पंचायत बलोह जनपद हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश

 

 

 

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