



हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- निर्जला एकादशी व्रत से अधिक मास सहित 26 एकादशियों के व्रत का फल प्राप्त होता है । इस दिन किया गया स्नान, दान जप, होम आदि अक्षय होता है ।

भीमसेनी एकादशी के नाम से प्रसिद्ध, इस दिन जप-होम से साल भर के व्रतों का फल




ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे *निर्जला एकादशी* और *भीमसेनी एकादशी* के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों में इस एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस एक व्रत को करने से मनुष्य को *अधिक मास सहित वर्ष भर की सभी 26 एकादशियों के व्रत का संपूर्ण फल* प्राप्त हो जाता है।






क्यों कहते हैं निर्जला एकादशी?



इस एकादशी का नाम *’निर्जला’* इसलिए पड़ा क्योंकि इसमें *सूर्योदय से द्वादशी के सूर्योदय तक जल ग्रहण किए बिना* व्रत रखा जाता है। महाभारत काल में भीमसेन को भूख सहन नहीं होती थी, इसलिए वे कोई व्रत नहीं रख पाते थे। तब महर्षि वेदव्यास ने उन्हें साल की केवल एक यही निर्जला एकादशी करने को कहा, जिससे सभी एकादशियों का पुण्य मिल जाए। तभी से इसे *भीमसेनी एकादशी* भी कहते हैं।




इस दिन का अक्षय पुण्य


पद्म पुराण के अनुसार, निर्जला एकादशी पर किया गया *स्नान, दान, जप, होम और उपवास अक्षय फल* देने वाला होता है। यानी इसका पुण्य कभी क्षय नहीं होता।
1. *स्नान*: ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र नदी या घर पर जल में गंगाजल डालकर स्नान करने से सारे पाप नष्ट होते हैं।
2. *दान*: इस दिन *जल से भरे कलश, पंखा, छाता, फल, अन्न और वस्त्र* का दान सर्वश्रेष्ठ माना गया है। मान्यता है कि जल दान करने से व्यक्ति को कभी यमलोक की यातना नहीं भोगनी पड़ती।
3. *जप-होम*: भगवान विष्णु के मंत्र *”ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”* का जप और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से 26 एकादशियों के बराबर फल मिलता है।


*व्रत के नियम*
1. एकादशी के दिन *चावल, बैंगन, मसूर दाल* का सेवन वर्जित है।
2. व्रती को *झूठ, क्रोध, निंदा* से बचना चाहिए और दिन भर भजन-कीर्तन में मन लगाना चाहिए।
3. जो लोग निर्जल नहीं रह सकते, वे *फलाहार* पर व्रत कर सकते हैं, लेकिन जल न पीने का विशेष महत्व है।
4. *रात्रि जागरण* का भी विधान है। भगवान विष्णु की कथा सुनने से व्रत पूर्ण होता है।
क्या है, वैज्ञानिक महत्व?
ज्येष्ठ माह में भीषण गर्मी पड़ती है। *निर्जला व्रत शरीर को विषैले तत्वों से मुक्त* करता है और आत्मसंयम बढ़ाता है। जल दान की परंपरा भी ग्रीष्म ऋतु में प्यासों की सेवा का संदेश देती है।
पंडित सुरेंद्र गौतम ने बताया _”कलयुग में जब हर एकादशी का व्रत रखना कठिन है, तो निर्जला एकादशी वरदान है। जो व्यक्ति पूरे साल एक भी व्रत न कर सके, वह केवल यह एक व्रत कर ले तो उसे 26 एकादशियों का पुण्य, मोक्ष और विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। इस दिन असहाय को जल पिलाना सबसे बड़ा धर्म है।”_
नोट: रोगी, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं चिकित्सक की सलाह लेकर ही निर्जल व्रत रखें।

















