



पूर्वोत्तर/सूर्य अध्ययन:- सोमवार
को यहां जिला पंचायत अधिकारी कार्यालय में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इस अवसर पर सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई देते हुए जिला अशासकीय अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि 2007 में महान अध्येता प्रोफेसर प्रशांत चंद्रा महलानोविस के जन्मदिवस 29 जून को राष्ट्रीय अध्येता दिवस के रूप में साहू का निर्णय लिया गया था।



महालनोविस का जन्म 29 जून, 1893 को बंगाल प्रेसीडेंसी के कलकत्ता में हुआ था। उन्हें भारतीय प्लास्टर का सामान्य ज्ञान माना जाता है। उन्होंने गणितीय अध्ययन में माप के लिए उपयोग किए जाने वाले महालनोविस रॉकेट का आविष्कार किया था।







वर्ष 1932 में उन्हें भारतीय पुरातत्व संस्थान की स्थापना की गयी, जिसे वर्ष 1959 में राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया गया। वर्ष 1950 में उन्होंने राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन (एनएसएसओ) की स्थापना की और छात्रवृत्ति संगठन के लिए सेंट्रल सांख्यिकी संगठन (एनएसएसओ) की स्थापना में अपना योगदान दिया।



महालनोविस प्रथम योजना आयोग के सदस्य और द्वितीय पंचवर्षीय योजना 1956-1961 के वास्तुशिल्प मुख्य फोकस औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा दिया गया था। पीसी महालनोविस को भौतिक शास्त्र के क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए वर्ष 1968 में भारत सरकार द्वारा पदम विभूषण से सम्मानित किया गया था।



इसके अलावा उनके अलावा अन्य अंतरराष्ट्रीय उद्यमियों द्वारा भी पद छोड़ दिया गया था। भारतीय डाक विभाग ने भी अपने सम्मान में एक डाक टिकट जारी किया था। पीसी महालनोविस का 28 जून, 1972 को कलकता में निधन हो गया।


अशोक कुमार ने बताया कि इस वर्ष छात्रवृत्ति दिवस का विषय ‘प्रशासनिक डेटा की क्षमता का मूल्यांकन’ रखा गया है।
उन्होंने कहा कि सरकारी मंजूरी और सेवाओं के लिए बेहतर साइंटिस्ट और आर्टिफिशियल तैयारी के लिए सही डेटा सबसे जरूरी है।
भारत में, इस विषय में नीति-निर्माण और सामाजिक अनुसंधान के क्षेत्र में काफी प्रमुखता ♠हासिल की है।


















