मजदूर यूनियन ने सीटू के बैनर तले प्रदेश भर से आए सैंकड़ों मजदूरों ने श्रम कल्याण बोर्ड के राज्य कार्यालय का किया जोरदार घेराव

हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ :-   हिमाचल प्रदेश भवन, सड़क एवं अन्य निर्माण मजदूर यूनियन (संबंधित सीटू) के बैनर तले प्रदेश भर से आए सैंकड़ों मजदूरों ने श्रम कल्याण बोर्ड के राज्य कार्यालय का जोरदार घेराव किया।

प्रदेश भर में हो रही भारी बारिश और तमाम अवरोधों के बावजूद प्रदेश भर से सैंकड़ों मजदूर सुबह से ही हमीरपुर की तहसील परिसर में इकट्ठा होना शुरू हुए और शहर के बीचों-बीच जुलूस निकालते हुए श्रम कल्याण बोर्ड के राज्य कार्यालय पर अपनी मांगों को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

हमीरपुर, शिमला, मंडी, कुल्लू, सोलन, सिरमौर, बिलासपुर, चंबा, किन्नौर तथा कांगड़ा जिलों से सैंकड़ों मजदूरों ने इस प्रदर्शन में भाग लिया।

 

उल्लेखनीय है कि जब से हिमाचल में सुख्खू सरकार बनी है, तब से ही श्रम कल्याण बोर्ड से निर्माण मजदूरों को मिलने वाले लाभ बंद कर दिए गए हैं। कल्याण बोर्ड द्वारा कभी मजदूरों का पंजीकरण और नवीनीकरण बंद कर दिया जाता है तो कभी ई-केवाईसी के नाम पर मजदूरों को परेशान किया जाता है।

वर्तमान स्थिति में श्रम कल्याण बोर्ड में वर्ष 2021 से ही मजदूरों के लाभ लंबित पड़े हैं। कई बार सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद भी लाभ जारी नहीं किए जा रहे हैं, जिससे मजदूरों में भारी रोष है।

कल्याण बोर्ड की कार्यप्रणाली इतनी लचर है कि अब मजदूरों को ई-केवाईसी के नाम पर भी लाभों से वंचित किया जा रहा है। पहले बोर्ड के पोर्टल के माध्यम से मजदूरों की ई-केवाईसी की गई, जिसे अब मानने से इंकार किया जा रहा है और नई ऐप के माध्यम से दोबारा ई-केवाईसी करने को कहा जा रहा है। तीन-तीन बार ई-केवाईसी करवाने के बावजूद भी मजदूरों को लाभ नहीं मिल रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि कल्याण बोर्ड का काम अब केवल मजदूरों को परेशान करना रह गया है।

 

श्रम कल्याण बोर्ड में जमा राशि का 95 प्रतिशत हिस्सा मजदूरों के कल्याण पर तथा केवल 5 प्रतिशत हिस्सा प्रशासनिक खर्चों पर व्यय करने का प्रावधान है, जबकि हिमाचल प्रदेश में प्रशासनिक खर्च लगभग 30 प्रतिशत तक पहुंच गए हैं और मजदूरों को अपने वैधानिक लाभों के लिए दर-दर भटकने को मजबूर किया जा रहा है।

 

मजदूरों के पंजीकरण एवं नवीनीकरण के लिए जारी किए जाने वाले रोजगार प्रमाण पत्रों को भी जिला श्रम कल्याण अधिकारी गैर-कानूनी तरीके से पंचायत प्रतिनिधियों से सत्यापित करवाने के लिए कह रहे हैं, जबकि सत्यापन का दायित्व स्वयं जिला श्रम कल्याण अधिकारियों का है।

 

श्रम कल्याण बोर्ड मजदूरों के कल्याण को भूलकर अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने और मजदूरों को परेशान करने वाला बोर्ड बनकर रह गया है।

आज के प्रदर्शन को सीटू के राष्ट्रीय सचिव डॉ. कश्मीर ठाकुर, राज्य महासचिव प्रेम गौतम, राज्य अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, निर्माण मजदूर यूनियन के राज्य अध्यक्ष जोगिंदर कुमार तथा राज्य महासचिव अमित कुमार ने संबोधित किया। नेताओं ने कहा कि मजदूरों की इन बुनियादी मांगों को लेकर श्रम कल्याण बोर्ड की बैठकों में कई बार निर्णय लिए गए, लेकिन आज तक उन्हें धरातल पर लागू नहीं किया गया।

प्रदर्शन के उपरांत सीटू एवं निर्माण मजदूर यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने श्रम कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष से मुलाकात कर मजदूरों की मांगों को मजबूती से रखा। वार्ता के दौरान बोर्ड अध्यक्ष ने माना कि 31 जुलाई 2026 तक मुख्यालय को भेजे जाने वाले सभी पात्र दावों का भुगतान 15 अगस्त 2026 से पहले कर दिया जाएगा।

उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि वर्ष 2021 से 2023 तक लंबित पेंशन, मृत्यु सहायता, छात्रवृत्ति तथा अन्य सभी दावों—जिनमें मनरेगा मजदूर, परियोजना मजदूर, मिस्त्री, इलेक्ट्रिशियन, वेल्डर, पेंटर तथा अन्य निर्माण श्रमिक शामिल हैं—को जिला श्रम कल्याण कार्यालयों से 15 अगस्त 2026 तक बोर्ड मुख्यालय भेजा जाएगा तथा उनका भुगतान 30 सितंबर 2026 तक कर दिया जाएगा। इसके लिए सभी जिला श्रम कल्याण अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे।

बैठक में यह भी तह किया गया कि पुराने लंबित दावों के लिए ई-केवाईसी कराने हेतु नवीनीकरण (Renewal) कराना आवश्यक नहीं होगा तथा बिना नवीनीकरण के भी ई-केवाईसी की जा सकेगी।

इसके अतिरिक्त बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि पंजीकरण एवं नवीनीकरण के सभी आवेदन जमा होने के 30 दिनों के भीतर निपटाए जाएंगे तथा इनके लिए किसी प्रकार के भौतिक सत्यापन की आवश्यकता नहीं होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भौतिक सत्यापन केवल लाभ संबंधी दावों (Claims) के मामलों में ही किया जाएगा।

यूनियन नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि बोर्ड अपने दिए गए आश्वासनों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर लागू नहीं करता है, तो हिमाचल भवन, सड़क एवं अन्य निर्माण मजदूर यूनियन (सीटू) पूरे प्रदेश में उग्र एवं निर्णायक आंदोलन छेड़ेगी, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रदेश सरकार एवं श्रम कल्याण बोर्ड की होगी।

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