



हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- विकास खंड नादौन के अंतर्गत संचालित राजीव गांधी प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना किसानों के लिए एक सफल एवं लाभकारी पहल साबित हो रही है।

योजना के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक खेती की वैज्ञानिक तकनीकों का प्रशिक्षण, स्थानीय संसाधनों से प्राकृतिक आदानों का निर्माण तथा कम लागत में सुरक्षित खेती करने के लिए निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका सकारात्मक प्रभाव अब किसानों के खेतों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।



इस वर्ष मक्की की फसल में फॉल आर्मी वर्म का प्रकोप अपेक्षाकृत अधिक देखने को मिला। इसके बावजूद योजना से जुड़े किसानों ने रासायनिक कीटनाशकों के स्थान पर प्राकृतिक खेती में तैयार किए गए अग्निअस्त्र का उपयोग कर कीट पर प्रभावी नियंत्रण प्राप्त किया।






प्रगतिशील किसान अर्जुन सिंह गुलेरिया ने बताया कि उन्होंने 5 लीटर देसी गाय के गौमूत्र, 500-500 ग्राम हल्दी, लहसुन एवं हरी मिर्च, 5 ग्राम हींग तथा वन तंबाकू से अग्निअस्त्र तैयार किया।


सभी सामग्री को अच्छी तरह उबालकर घोल को उसकी मूल मात्रा के लगभग एक-चौथाई तक रहने दिया गया। इसके बाद घोल को ठंडा करके छान लिया गया तथा इसकी लगभग 100 मिलीलीटर मात्रा को स्प्रे पंप में पानी के साथ मिलाकर मक्की की फसल पर छिड़काव किया गया, जिससे फॉल आर्मी वर्म का प्रभाव सफलतापूर्वक नियंत्रित हुआ।



इस प्राकृतिक तकनीक को अपनाते हुए ग्राम रेल के मुनी लाल, कमलाह के रमेश चंद जरियाल, फस्ते के प्रमोद सिंह पठानिया, बड़ा के चंद किशोर, कद्रोला प्लासी के तारा चंद, अनु बाला, चंद्रेश कुमारी, अनीता कुमारी सहित योजना से जुड़े अनेक किसानों ने भी अपने-अपने खेतों में अग्निअस्त्र का प्रयोग किया। किसानों ने बताया कि इस प्राकृतिक घोल के प्रयोग से फॉल आर्मी वर्म के प्रकोप में उल्लेखनीय कमी आई तथा मक्की की फसल सुरक्षित रही।


किसानों ने कहा कि राजीव गांधी प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है। अब वे अपने खेतों में स्थानीय संसाधनों से ही प्राकृतिक आदान तैयार कर कम लागत में फसलों की सुरक्षा कर रहे हैं।
योजना के माध्यम से प्राप्त प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन के कारण किसानों का प्राकृतिक खेती के प्रति विश्वास लगातार बढ़ रहा है और क्षेत्र में अधिक से अधिक किसान इस अभियान से जुड़ रहे हैं।
योजना से जुड़े किसानों ने अन्य कृषकों से भी प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाने तथा अग्निअस्त्र एवं अन्य प्राकृतिक घोलों का उपयोग कर सुरक्षित, टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने की अपील की।


















