बीते कल केंद्र सरकार का क्रूर और कायर चेहरा सामने आया: संदीप सांख्यान

बिलासपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- देश के शिक्षा मंत्री के त्यागपत्र की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर पर आंदोलनरत युवाओं और मीडिया पर बीते कल जिस प्रकार से दिल्ली पुलिस की आड़ में सरकार ने अपना क्रूर एवं कायर चेहरा दिखाया है, उसे युगों युगों तक याद रखा जाएगा।

 

कांग्रेस की सरकारों से नैतिकता सीखें केंद्र सरकार… संदीप सांख्यान

 

 

प्रदेश कांग्रेस के पूर्व मीडिया कॉर्डिनेटर संदीप सांख्यान ने कहा कि जिस देश में शिक्षा के लिए लड़ रहे युवाओं पर वार्ता करने की बजाए अत्याचार हो या लाठियां बरसाई जाएं तो समझ लेना चाहिए कि हुक्मरानों को शिक्षा से कोई लेना देना नहीं है।

 

सत्य निष्ठा की शपथ लेने वाले, नैतिक जिम्मेदारी भूल गए….संदीप सांख्यान

 

नीट पेपर लीक होने पर लाखों युवाओं का भविष्य न सिर्फ अधर में लटका बल्कि कई बच्चों ने तो आत्महत्या तक कर ली। सरकार के लिए इससे बड़ी शर्म की बात और क्या हो सकती है, कि आजाद देश में आवाज उठाना भी एक जुर्म हो गया है।

 

जिस प्रकार जंतर मंतर पर सारे प्रकरण की पटकथा लिखकर उसे अंजाम दिया गया वह वास्तव में एक तानाशाही और निरंकुशता का प्रमाण है।

 

 

संदीप सांख्यान ने कहा कि संविधान की शपथ लेकर संसद तक पहंुचने वाले ही संवैधानिक आधारों को भूल गए हैं। युवा केवल इस्तीफे की मांग कर रहे हैं न कि सरकार को गिराने की बात, लेकिन यदि हालात ऐसे ही रहे तो वह दिन भी दूर नहीं जब सरकार को भी देश का युवा बाहर का रास्ता दिखाएगा।

 

 

निहत्थे बच्चों, बेटियों, महिलाओं और बच्चों पर पुलिस का कहर जमकर टूटा है। हैरानी इस बात की है कि एक व्यक्ति को बचाने के लिए पूरा तंत्र एकजुट हो गया है। देश से ज्यादा अपनी राजनीति और सरकार को अहमियत देने वालों को कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल से सबक लेना चाहिए।

 

 

जिनमें न सिर्फ संवेदनशीलता थी बल्कि जबावदेही के नाम पर इस्तीफा और दंडात्मक कार्यवाही भी होती थी। जिसमें ए.राजा ने टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले में नाम आने और केंद्रीय सतर्कता आयोग विपक्षी दबाव के चलते संचार मंत्री के पद से नवंबर 2010 में इस्तीफा दिया था।

 

 

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहते हुए अशोक चव्हाण आदर्श हाउसिंग सोसाइटी घोटाले के आरोप लगने के बाद नवंबर 2010 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था।

 

 

 

दयानिधि मारन टेलीकॉम लाइसेंस आवंटन और एयरसेल मैक्सिस सौदे में कथित अनियमितताओं के कारण जुलाई 2011 में कपड़ा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था। पवन कुमार बंसल उनके भतीजे द्वारा रेलवे बोर्ड के एक सदस्य की नियुक्ति के बदले रिश्वत लेने के मामले में नाम आने पर मई 2013 में रेल मंत्री पद से इस्तीफा दिया था।

 

 

अश्वनी कुमार ने कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े सीबीआई जांच रिपोर्ट में कथित तौर पर बदलाव और हस्तक्षेप करने के सुप्रीम कोर्ट के आरोपों के बाद मई 2013 में कानून मंत्री पद से इस्तीफा दिया था।

 

 

यही नहीं नैतिकता के आधार पर पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह, सुरेश कलमाड़ी, नटवर सिंह आदि को भी अपने मंत्री पद छोड़ने पड़े थे। लेकिन अब नैतिकता के मायने ही बदल गए हैं।

 

 

सवाल पूछने पर देशद्रोही की तमगा दिया जाता है। जबकि नीट पेपर घोटाले, राम मंदिर चन्दा चोरी, ऑपरेश सिंदूर, पुलवामा, पहलगाम अटैक आदि कई मामले आज भी रहस्य से बाहर नहीं निकल पाए हैं। अब वक्त जनता को जबाव देने का आ गया है अन्यथा जनता जबाव देना जानती है।

 

 

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