




हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ :- मेरा ढोल ,मेरी डफली और मेरी ही बीन कुछ इस प्रकार रहा भाजपा रैली में दिए भाषणों का निष्कर्ष।।
तालमेल की कमी और आपसी सामंजस्य या फिर अंदर खाते की अंतर्कलह।








तर्कसंगत यह है कि जिस प्रकार से कैबिनेट मंत्री अनुराग ठाकुर या नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल सबकी भाषण की अपनी ही पाटड़िया थी। कहने का मतलब है सब अपने तक सीमित थे, बावजूद इसके जय राम ठाकुर और राजीव बिंदल ने लोगों से प्रत्याशियों के लिए वोट मागने की अपील की परंतु अनुराग ठाकुर द्वारा मोदी सरकार की उपलब्धियां ही गिनाई गई।




महत्वपूर्ण है।की रैली में मौजूद कार्यकर्ताओं में जोश की कमी नजर आई कहीं ना कहीं यह कह सकते हैं कि सूनापन या खालीपन कार्यकर्ताओं की और से दिखा वह अमूमन भाजपा में नही देखा जाता। अनुशासित कार्यकर्ता सिर्फ और सिर्फ बीजेपी को मजबूत करता दिखता है।


हमीरपुर रैली का मुख्य उद्देश्य
हमीरपुर रैली का आयोजन जिस मानसिकता के आधार पर किया गया उसको लेकर प्रत्येक हिमाचल प्रदेश के नागरिक में एक जिज्ञासा वह उत्सुकता थी। शाहजहां मंच करने के बावजूद भी कहीं ना कहीं आपसी ताल-मेल की कमी नजर आए। भाजपा जिस आक्रामक अंदाज के लिए जानी जाती हैं वह चीज आज कहीं छूटती नजर आई।
गौरतलब है जैसे ही नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर अपने भाषण के लिए मंच पर आते हैं ठीक उसी समय पर कुछ एक कार्यकर्ता बस निकलने की करते हैं यह स्थिति बहुत ही उलझन वाली नजर आती है। ऐसा प्रतीत होता है कि पहले से ही कार्यकर्ताओं को दिशा निर्देश दिए गए हैं कि जैसे ही नेता प्रतिपक्ष भाषण के लिए आएंगे आप बस कुर्सी से उठकर निकालने का कीजिएगा।

जिस जिम्मेवारी के तहत राजीव बिंदल ने उत्साह दिखाते हुए कार्यकर्ताओं में एक जोश डालने की कोशिश की वही हम कह सकते हैं अपने आप में एक आज की रैली की उपलब्धि थी। अमूमन जय राम ठाकुर पूर्व मुख्यमंत्री के भाषणों में वह तीखापन जो आमतौर पर हम देखते हैं वह था नहीं ना ही वहां पर वह एक जोश का माहौल भी नहीं दिखता सा नजर आया।

क्या यह अंतर्कलह है
आगामी लोकसभा और विधानसभा को लेकर जो आज सांझा मंच भाजपा के प्रत्याशियों एवं प्रदेश भाजपा कोर कमेटी के लोगों द्वारा किया गया उसमें कहीं ना कहीं एक खालीपन सा दिखा तालमेल से लेकर एक दूसरे के लिए सहयोग नहीं लगा मात्र मंच सांझ करके दिल एक नहीं होते ऐसा प्रतीत हुआ।
मात्र मंच सांझ करके दिल एक नहीं होते
और यही चीज खास तौर पर कार्यकर्ताओं के जोश में देखने को मिले। कहीं ना कहीं शक्ति का संचार ऐसा प्रतीत हुआ की कार्यकर्ताओं में था ही नहीं। अगर स्थितियां ऐसी रहे तो इन चुनाव को लेकर जो एक परिदृश्य बना था वह बिखरता सा नजर आ रहा है और कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं मेंआत्मविश्वास के लिए यह छोटी-छोटी घटनाक्रम संजीवनी या फिर कह सकते हैं चमनप्राश का काम करेगी।
आज मुझे ऐसा कहीं नही लगा। शायद हमीरपुर की जनता में यह चीज हाफी होती नजर आ रही है कि जो गलती सुजानपुर ने पूर्व मुख्यमंत्री धूमल को हराकर की थी उसकी पुनरावृत्ति ना हो।
हमीरपुर की भाजपा धूमल के साथ
कुछ लोगों का कहना था कि हम सिर्फ और सिर्फ भाजपा में धूमल जी को जानते हैं और किसी को नहीं नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर हमीरपुर में भाजपा को तोड़ने की साजिश कर रहे हैं लेकिन हम ऐसा होने नहीं देंगे बाहर से आई लोगों का हम साथ नहीं देंगे।
खाली रहीं कुर्सियां
कार्यकर्ता अपने-अपने प्रत्याशी या फिर नेता को सुनकर निकल लिए
जब नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के भाषण की बारी आई तो लोग उठ कर चले गए ऐसा लगा मानो वह जयराम ठाकुर को सुनना ही नहीं चाहते थे लोगों ने यह संदेश तो उन्हें दे ही दिया कि हम सिर्फ और सिर्फ अनुराग और धूमल के साथ हैं
रैली में आई हुई जनता धीमी आवाज में कह रही थी कि हम आ तो गए हैं लेकिन इस बार होगा कुछ और ही रैली में कुछ लोग सिर्फ दिखावे के लिए ही आए थे कि हम आपके साथ हैं। हम सिर्फ और सिर्फ अनुराग ठाकुर के लिए आए हैं



