शिक्षा नहीं, शुल्क वसूली की सरकार! फीस वृद्धि से छात्रों के भविष्य पर सीधा हमला – नैंसी अटल

शिमला/विवेकानंद वशिष्ठ :- अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश की प्रदेश मंत्री नैंसी अटल ने बयान जारी करते हुए कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार शिक्षा को अधिकार नहीं, बल्कि कमाई का साधन बना चुकी है।

 

छात्रों की जेब काटकर विश्वविद्यालय नहीं चलेंगे!सरकार अपनी नाकामी का बोझ छात्रों पर न डाले – नैंसी अटल

सरकार ने शिक्षण संस्थानों को शिक्षा के केंद्र के बजाय शोषण और आर्थिक लूट का अड्डा बना दिया है, जहां विद्यार्थियों से लगातार बढ़ी हुई फीस के माध्यम से आर्थिक वसूली की जा रही है।

प्रदेश सरकार ने शिक्षण संस्थानों को बना दिया शोषण और लूट का केंद्र – अभाविप

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) में विभिन्न पाठ्यक्रमों एवं परीक्षा संबंधी शुल्कों में 25–27 प्रतिशत तथा डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में 52–62 प्रतिशत तक की गई फीस वृद्धि प्रदेश सरकार की छात्र एवं शिक्षा विरोधी मानसिकता को उजागर करती है। महंगाई और बेरोजगारी के दौर में विद्यार्थियों पर इतना बड़ा आर्थिक बोझ डालना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि चुनावों के समय युवाओं को सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का वादा करने वाली सरकार आज उन्हीं छात्रों से शिक्षा की कीमत वसूलने में लगी है। विश्वविद्यालयों की वित्तीय अव्यवस्था का बोझ विद्यार्थियों पर डालना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। शिक्षा व्यापार का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण आधार है।

नैंसी अटल ने कहा कि लगातार बढ़ती फीस के कारण गरीब, ग्रामीण एवं मध्यमवर्गीय परिवारों के अनेक विद्यार्थी उच्च शिक्षा से वंचित होने को मजबूर होंगे। यदि सरकार वास्तव में शिक्षा के प्रति गंभीर है तो विश्वविद्यालयों को पर्याप्त बजटीय सहायता उपलब्ध कराए, न कि छात्रों की जेब पर डाका डाले।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद मांग करती है कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, नौणी विश्वविद्यालय सहित प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में की गई फीस वृद्धि को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। यदि सरकार ने शीघ्र यह छात्र विरोधी निर्णय वापस नहीं लिया तो परिषद पूरे प्रदेश में चरणबद्ध लोकतांत्रिक आंदोलन चलाकर छात्र हितों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरेगी।

[post-views]