





प्रतियोगिता में शिखा ने प्रथम, महक ने द्वितीय तथा दीक्षा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग से आये जिला शिक्षा एवं संप्रेषण अधिकारी सुनील कुमार रांगड़ा ने अपने संबोधन में बताया कि जन्म के एक घंटे के भीतर शिशु को स्तनपान शुरू कराना तथा पहले छह माह तक केवल माँ का दूध
देना शिशु के संपूर्ण विकास, रोग प्रतिरोधक क्षमता और बेहतर पोषण के लिए अत्यंत आवश्यक है।



छह माह के बाद ऊपरी आहार के साथ दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखने की सलाह दी जाती है।






उन्होंने कहा कि माँ का दूध शिशु के लिए सर्वोत्तम, सुरक्षित एवं संपूर्ण आहार है। इससे डायरिया, निमोनिया और अन्य संक्रमणों का खतरा कम होता है तथा शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है। साथ ही, स्तनपान
माताओं के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है।


विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में गर्भवती एवं धात्री माताओं को स्तनपान के महत्व, सही तकनीक, केवल माँ का दूध देने तथा परिवार के सहयोग की आवश्यकता के बारे में जागरूक किया जा
रहा है।



स्वास्थ्य विभाग ने सभी परिवारों से अपील की है कि वे स्तनपान को प्रोत्साहित करें और माताओं को आवश्यक सहयोग प्रदान करें, ताकि प्रत्येक शिशु को जीवन की स्वस्थ शुरुआत मिल सके।


इस अवसर पर बीसीसी कोऑर्डिनेटर सलोचना देवी ने भी अपने विचार रखे उन्होंने बताया कि माँ का दूध शिशु के लिए पहला प्राकृतिक टीकाकरण है, जो उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका
निभाता है।
उसका शारीरिक, बौद्धिक एवं मानसिक विकास बेहतर होता है। उन्होंने बताया कि स्तनपान केवल शिशु के लिए ही नहीं, बल्कि माँ के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है।
संबंधित कुछ प्रकार के कैंसर का जोखिम कम हो सकता है। इस अवसर पर स्वास्थ्य कार्यकर्ता सरोज, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कौशल्या, नीला एवं रजनी तथा आशा कार्यकर्ता भी उपस्थित रहीं।


















