बाबा बालकनाथ के श्रद्धालुओं की आस्था का हो उचित सम्मान, मंदिर मार्ग से मीट-मांस, मछली व शराब की दुकानें हटाई जाएं: अनुराग सिंह ठाकुर

नई-दिल्ली/विवेकानंद वशिष्ठ:-  पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने शाहतलाई स्थित सिद्धपीठ बाबा बालकनाथ मंदिर के मुख्य मार्ग पर खुले मीट-मांस, मछली एवं शराब के विक्रय केंद्रों को लेकर श्रद्धालुओं द्वारा लगातार उठाई जा रही आपत्तियों का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को पत्र लिखकर श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था एवं भावनाओं के अनुरूप उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया है।

मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर श्रद्धालुओं की भावनाओं के अनुरूप शीघ्र उचित कार्रवाई का किया आग्रह

अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि देवभूमि हिमाचल प्रदेश के प्राचीन एवं पवित्र मंदिर न केवल प्रदेश, बल्कि पूरे देश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। शाहतलाई स्थित सिद्धपीठ बाबा बालकनाथ मंदिर भी उत्तर भारत के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

 

वर्ष भर हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों के अतिरिक्त पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, चंडीगढ़ तथा अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा बालकनाथ के दर्शन के लिए आते हैं। विशेषकर चैत्र मास के मेले के दौरान लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचकर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

उन्होंने कहा कि उन्हें ईमेल एवं अन्य माध्यमों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अवगत कराया है कि मंदिर के मुख्य मार्ग पर संचालित मीट-मांस, मछली एवं शराब की दुकानों के कारण उन्हें धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचने के साथ-साथ असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है।

 

श्रद्धालुओं ने आग्रह किया है कि इन दुकानों को मंदिर मार्ग से हटाकर किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित किया जाए, ताकि मंदिर की पवित्रता, धार्मिक वातावरण और श्रद्धालुओं की आस्था अक्षुण्ण बनी रहे।

 

उन्होंने कहा कि बाबा बालकनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और विश्वास का प्रतीक हैं। हिमाचल प्रदेश सहित पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और देश के अनेक हिस्सों से श्रद्धालु वर्षों से अपनी पारिवारिक, सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं के साथ इस पवित्र धाम में दर्शन करने आते हैं।

 

ऐसे में मंदिर के मुख्य मार्ग का वातावरण भी उसी पवित्रता और गरिमा के अनुरूप होना चाहिए, जिससे किसी भी श्रद्धालु की धार्मिक भावनाएं आहत न हों।

 

अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि धार्मिक स्थलों के आसपास श्रद्धालुओं की आस्था, स्थानीय परंपराओं तथा सांस्कृतिक मूल्यों का सम्मान करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

 

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार इस विषय की संवेदनशीलता को समझते हुए श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करेगी और शीघ्र आवश्यक कदम उठाएगी।

 

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