



शिमला/विवेकानंद वशिष्ठ :- हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति ने सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक, शिक्षाविद्, जन विज्ञान आंदोलन के प्रखर चिंतक तथा भारत ज्ञान विज्ञान समिति के संस्थापक सचिव डॉ. एम.पी. परमेश्वरन के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। समिति ने उनके निधन को देश के जन विज्ञान आंदोलन, प्रगतिशील आंदोलन और वैज्ञानिक चेतना के अभियान के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।

हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तँवर, राज्याध्यक्ष प्रो. टी.डी. वर्मा तथा राज्य सचिव एवं कोषाध्यक्ष जीयानन्द शर्मा ने कहा कि डॉ. परमेश्वरन ने अपना पूरा जीवन विज्ञान को आम लोगों से जोड़ने, वैज्ञानिक दृष्टिकोण को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाने तथा विकास की वैकल्पिक सोच को आगे बढ़ाने में समर्पित किया।



जन विज्ञान कार्यकर्ताओं के बीच स्नेह और सम्मान से ‘एम.पी.’ के नाम से लोकप्रिय डॉ. परमेश्वरन का हिमाचल से भी गहरा जुड़ाव रहा। उनके 1993 में शिमला आने को याद करते हुए डॉ. कुलदीप सिंह तँवर ने कहा कि हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति के पहले राज्य सम्मेलन में डॉ. परमेश्वरन की उपस्थिति प्रदेश के कार्यकर्ताओं के लिए नई ऊर्जा, उत्साह और प्रेरणा का स्रोत बनी। उनके विचारों और सक्रिय मार्गदर्शन ने हिमाचल में जन विज्ञान आंदोलन को नई दिशा देने और उसे तेजी से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।






डॉ. परमेश्वरन का मानना था कि किसी भी प्रदेश के विकास की योजना वहां की वास्तविक परिस्थितियों, स्थानीय संसाधनों, क्षमताओं, कमजोरियों और संभावनाओं की गहरी समझ के आधार पर तैयार होनी चाहिए। हिमाचल के संदर्भ में भी उनका सपना था कि प्रदेश की अपनी मजबूतियों और चुनौतियों को समझते हुए विकास का एक वैकल्पिक खाका तैयार किया जाए, जिसके आधार पर जन संगठनों द्वारा सरकारों के समक्ष नीतिगत हस्तक्षेप और जनहित की पैरवी की जाए।


हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति ने कहा कि आज जब विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन, पर्यावरणीय संकट, जलवायु परिवर्तन, बढ़ती असमानता और स्थानीय समुदायों की विकास प्रक्रिया में सीमित भागीदारी जैसे सवाल हमारे सामने हैं, तब डॉ. परमेश्वरन की यह सोच और भी अधिक प्रासंगिक हो जाती है।



केरल में उनके नेतृत्व में विकसित ‘पीपल्स प्लान’ इसी सोच का एक महत्वपूर्ण उदाहरण था। विकेंद्रीकृत योजना निर्माण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर आधारित इस पहल ने केरल में विकास की प्रक्रिया को नई दिशा दी और बाद में देश में भी ऐसी सोच को आगे बढ़ाने के प्रयास हुए।


समिति के नेताओं ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद डॉ. परमेश्वरन का जुड़ाव हमेशा जमीन से रहा। वे कार्यकर्ताओं, समुदायों और आम लोगों के अनुभवों को सीखने का महत्वपूर्ण स्रोत मानते थे। उनका विश्वास था कि जन विज्ञान आंदोलन केवल विज्ञान के प्रचार-प्रसार तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि उसे समाज की वास्तविक समस्याओं, विकास की दिशा और आम लोगों के जीवन से जोड़ना होगा।
डॉ. परमेश्वरन लगातार जन विज्ञान आंदोलन को नई दृष्टि, नया परिप्रेक्ष्य और नई कार्यशैली देने का प्रयास करते रहे। विज्ञान, तकनीक, विकास, लोकतंत्र और सामाजिक परिवर्तन के सवालों को उन्होंने व्यापक जन सरोकारों से जोड़कर देखा। यही उनकी सबसे बड़ी वैचारिक विरासत है।
हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति ने कहा कि डॉ. एम.पी. परमेश्वरन के निधन से जन विज्ञान आंदोलन ने एक ऐसे चिंतक, विचारक, वैज्ञानिक और मार्गदर्शक को खो दिया है, जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी। उनके विचार, उनकी कार्यशैली और आम जनता को विज्ञान एवं विकास की प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार बनाने का उनका सपना आने वाली पीढ़ियों के कार्यकर्ताओं को प्रेरित करता रहेगा।
समिति ने डॉ. परमेश्वरन के परिजनों, साथियों और देशभर के जन विज्ञान कार्यकर्ताओं के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

सत्यवान पुंडीर
राज्य सचिव

















