



हैदराबाद/विवेकानंद वशिष्ठ:- पहाड़ों की प्राकृतिक खेती अब देश के बड़े कृषि मंच पर अपनी पहचान बना रही है। राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंधन संस्थान MANAGE, हैदराबाद में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश ने राजीव गांधी प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना की सफलता और किसानों के अनुभवों को देशभर से आए कृषि अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत कर एक बार फिर प्रदेश की प्राकृतिक खेती की तस्वीर देश के सामने रखी।

हैदराबाद में हिमाचल का डंका




कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, पंजाब, आंध्र प्रदेश, मिजोरम, असम, मध्य प्रदेश सहित अनेक राज्यों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।






MANAGE में राजीव गांधी प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना की गूंज



हिमाचल की प्रस्तुति के दौरान प्राकृतिक खेती को लेकर ऐसा माहौल बना कि विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने योजना की बारीकियों, किसानों को मिलने वाले लाभ और उत्पादों के बेहतर मूल्य को लेकर विशेष रुचि दिखाई।



हिमाचल की ओर से पांच प्रतिनिधियों ने संभाला मोर्चा



राष्ट्रीय मंच पर हिमाचल की आवाज बुलंद करने वालों में जिला शिमला के Deputy Project Director Dr. Naresh Chauhan, BTM बिझड़ी Nitish Kumar, ATM नादौन Akshay Kumar Chadha, BTM हरोली (ऊना) Ankush तथा BTM Sonia शामिल रहे।
CETARA Certification और किसानों को मिल रहे बेहतर दाम बने चर्चा का केंद्र

इन प्रतिनिधियों ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए हिमाचल में किए जा रहे प्रयासों, किसानों के प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, कम लागत वाली खेती और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने की व्यवस्था को विस्तार से प्रस्तुत किया।
CETARA Certification पर टिकी सबकी नजर


प्रस्तुति के दौरान CETARA Certification ने खासा ध्यान आकर्षित किया। प्राकृतिक खेती के उत्पादों की पहचान, प्रमाणिकता और विश्वसनीयता को मजबूत करने की दिशा में हिमाचल के इस प्रयास को विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने सराहा।

हिमाचल की इस पहल ने यह संदेश दिया कि प्राकृतिक खेती का सफर केवल खेत तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रमाणीकरण से लेकर बाजार तक किसान के उत्पाद को मजबूत पहचान देने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
₹80 किलो गेहूं सुनकर चौंके राज्यों के प्रतिनिधि
प्रस्तुति का सबसे चर्चित हिस्सा रहा प्राकृतिक खेती के उत्पादों के लिए किसानों को मिलने वाला बेहतर मूल्य।
प्रतिभागियों को बताया गया कि प्राकृतिक खेती के तहत उत्पादित गेहूं ₹80 प्रति किलो, मक्का ₹50 प्रति किलो और कच्ची हल्दी ₹150 प्रति किलो के निर्धारित/समर्थित मूल्य पर खरीदी जा रही है।
इन आंकड़ों ने कार्यक्रम में मौजूद विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों का ध्यान खींचा। बेहतर मूल्य की व्यवस्था को उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने वाली **अलग और प्रभावी पहल** बताया।
खेती बदली, सोच बदली, किसान की तस्वीर बदली’
हिमाचल की प्रस्तुति का सार यही रहा कि प्राकृतिक खेती केवल रासायनिक खाद और कीटनाशकों के विकल्प तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य खेती की लागत घटाना, किसान की आमदनी बढ़ाना, मिट्टी और पर्यावरण को सुरक्षित रखना तथा उत्पाद को बेहतर बाजार उपलब्ध करवाना है।
यही वजह रही कि देश के अलग-अलग राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने हिमाचल प्रदेश के मॉडल को ध्यान से समझा और योजना के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
हिमाचल से देश तक पहुंचा प्राकृतिक खेती का संदेश
MANAGE हैदराबाद का यह राष्ट्रीय मंच हिमाचल प्रदेश के लिए सिर्फ एक प्रस्तुति का अवसर नहीं रहा, बल्कि अपने प्राकृतिक खेती मॉडल को देश के सामने रखने का बड़ा मंच साबित हुआ।
राजीव गांधी प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना, CETARA Certification और किसानों को बेहतर मूल्य—इन तीनों पहलुओं ने हिमाचल की प्राकृतिक खेती को राष्ट्रीय मंच पर एक अलग पहचान दिलाई।
कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया ने यह साबित किया कि **हिमाचल की प्राकृतिक खेती अब केवल पहाड़ों की कहानी नहीं रही, बल्कि देशभर में चर्चा और सीख का विषय बन रही है।**
हिमाचल का संदेश साफ है
“प्राकृतिक खेती अपनाएं, लागत घटाएं, उत्पाद की पहचान बढ़ाएं और किसान की आय को मजबूत बनाएं।”

















