



शिमला/विवेकानंद वशिष्ठ :- हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) इकाई के तत्वावधान में स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआइ) ने आज परिसर में विश्वविद्यालय प्रशासन की तानाशाही नीतियों और लगातार जारी छात्र विरोधी निर्णयों के खिलाफ एक विशाल और उग्र विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया।

इससे पहले भी एसएफआइ ने बीते 12 अगस्त को विश्वविद्यालय परिसर में एक जोरदार सांकेतिक प्रदर्शन किया था और विश्वविद्यालय अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी थी कि वे छात्रों पर लादी गई बेतहाशा फीस वृद्धि को तुरंत वापस लें और परिसर में हुई धांधलियों पर नकेल कसें।



हालांकि, 12 अगस्त के चेतावनी प्रदर्शन के बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों की जायज मांगों पर कोई संज्ञान नहीं लिया और अपने ढुलमुल रवैये को बरकरार रखा, जिसके विरोध स्वरूप आज 19 अगस्त को एसएफआइ को दोबारा सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन का रास्ता अख्तियार करना पड़ा।






आज के इस विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता अंकिता, मुकेश और विक्की भारती ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखे प्रहार किए। वक्ताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर शिक्षा के व्यापारीकरण और परिसर में भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का सीधा आरोप लगाया।


उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में बढ़ाई गई फीस से सामान्य और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले गरीब छात्रों के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना बेहद मुश्किल हो गया है, जिसे एसएफआइ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।



इसके साथ ही छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय में बिना नियमों का पालन किए की गई 186 अवैध प्रोफेसरों की नियुक्तियों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया और मांग की कि इन धांधलीपूर्ण भर्तियों की सच्चाई जनता के सामने लाने के लिए तत्काल एक उच्चस्तरीय न्यायिक समिति का गठन किया जाए, ताकि इन फर्जी नियुक्तियों को रद्द करके इसमें संलिप्त अधिकारियों और दोषियों पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके।


अपने संबोधन में कैंपस सचिव मुकेश ने विश्वविद्यालय में लंबे समय से बंद पड़े छात्र मध्यस्थ संघ (एससीए) के चुनावों को तुरंत बहाल करने की भी पुरजोर मांग उठाई। उन्होंने कहा कि एससीए चुनाव छात्रों का संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार हैं, जिन्हें छीनकर प्रशासन परिसर में अपनी मनमानी थोपना चाहता है।
वक्ताओं ने विश्वविद्यालय अधिकारियों को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रशासन ने 12 अगस्त के अल्टीमेटम और आज के इस विशाल प्रदर्शन के बाद भी फीस वृद्धि को वापस नहीं लिया, 186 अवैध भर्ती मामले पर न्यायिक जांच कमेटी का गठन नहीं किया और एससीए चुनाव की तिथियों की घोषणा नहीं की, तो एसएफआइ आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और अधिक तीव्र करेगी तथा इसे केवल विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित न रखकर पूरे प्रदेश स्तर पर ले जाएगी, जिसकी संपूर्ण नैतिक व प्रशासनिक जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।


















