ओडिशा में राष्ट्रीय कार्यशाला में डॉ. चौहान ने प्रस्तुत किया हिमाचल का फसल विविधीकरण एवं सिंचाई मॉडल

हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ :-  हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना-II (HPCDP-II), जायका ओडीए, हमीरपुर के परियोजना निदेशक डॉ. सुनील चौहान ने ओडिशा सरकार के जल संसाधन विभाग द्वारा जायका एवं निप्पॉन कोई के सहयोग से आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला “स्मार्ट सिंचाई एवं मांग-आधारित जल प्रबंधन के लिए डिजिटल तकनीकों का उपयोग” में हिमाचल प्रदेश में फसल विविधीकरण एवं सिंचाई विकास के अनुभव प्रस्तुत किए।

एक दिवसीय कार्यशाला में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों, विकास भागीदारों तथा विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। इसमें आधुनिक सिंचाई सेवा वितरण, जल उपयोग दक्षता, जलवायु-अनुकूल कृषि, सहभागी जल प्रबंधन तथा डिजिटल तकनीकों के उपयोग पर चर्चा की गई।

डॉ. सुनील चौहान ने “जलवायु-अनुकूल सिंचाई, कृषि-जल अभिसरण एवं आजीविका संवर्धन” विषयक तकनीकी सत्र में प्रस्तुति देते हुए जायका-सहायता प्राप्त हिमाचल प्रदेश में सिंचाई विकास और फसल विविधीकरण के अनुभव साझा किए।

उन्होंने बताया कि सिंचाई विकास को फसल विविधीकरण, किसान-केंद्रित कृषि विकास तथा आजीविका संवर्धन से जोड़ना परियोजना के प्रमुख दृष्टिकोणों में शामिल है।

उन्होंने हिमाचल प्रदेश की कृषि-जलवायु परिस्थितियों, कृषि क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों तथा कृषि विकास में जायका ओडीए के सहयोग के साथ-साथ HPCDP-II के उद्देश्यों, प्रगति एवं कार्यान्वयन ढांचे पर भी प्रकाश डाला।

प्रस्तुति में परियोजना के प्रमुख घटकों—अवसंरचना विकास, किसान सहायता, मूल्य श्रृंखला एवं बाजार विकास तथा सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC)—के माध्यम से परियोजना की योजना एवं कार्यान्वयन प्रक्रिया को समझाया गया।

कार्यशाला में जल उपलब्धता, फसल योजना, खेत स्तर की मांग, किसान संस्थाओं तथा डिजिटल सूचना प्रणालियों के बीच बेहतर समन्वय को प्रभावी एवं मांग-आधारित जल प्रबंधन के लिए आवश्यक बताया गया। साथ ही, सूक्ष्म सिंचाई, जलवायु-अनुकूल कृषि, डेटा आधारित जल प्रबंधन और तकनीक-सक्षम निर्णय प्रक्रिया को भविष्य के लिए महत्वपूर्ण घटकों के रूप में रेखांकित किया गया।

तकनीकी सत्रों में ओडिशा, झारखंड एवं राजस्थान के सिंचाई एवं आजीविका मॉडल के साथ-साथ जापान और इंडोनेशिया के जल प्रबंधन में डिजिटल परिवर्तन से जुड़े अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी साझा किए गए। कार्यशाला का समापन प्रमुख सुझावों एवं आगे की कार्ययोजना पर विचार-विमर्श के साथ हुआ।

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