



हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की विभिन्न मांगों को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद तकनीकी विश्वविद्यालय इकाई द्वारा शुरू की गई भूख हड़ताल शुक्रवार को दूसरे दिन भी जारी रही।


एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक विद्यार्थियों की जायज मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।




विद्यार्थियों की प्रमुख मांगों में हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय में स्थायी कुलपति की नियुक्ति, विश्वविद्यालय को सेल्फ फाइनेंस व्यवस्था से बाहर निकालकर सरकार की ओर से उचित वित्तीय सहयोग प्रदान करना, ताकि विद्यार्थियों पर फीस का अतिरिक्त बोझ न पड़े, हॉस्टल सुविधा उपलब्ध करवाना, कैंटीन की व्यवस्था सहित अन्य छात्रहित से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।







प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य कृष ने कहा कि तकनीकी विश्वविद्यालय में लंबे समय से कुलपति का पद रिक्त है। उन्होंने कहा कि लगभग दो वर्ष बीतने को हैं, लेकिन सरकार और प्रशासन अभी तक कुलपति की नियुक्ति नहीं कर पाए हैं। यह सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।



उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय सेल्फ फाइनेंस व्यवस्था पर संचालित होने के कारण विद्यार्थियों से अधिक फीस वसूली जा रही है। जब अन्य संस्थानों में समान पाठ्यक्रम अपेक्षाकृत कम फीस में उपलब्ध हैं, तो तकनीकी विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों पर इतना आर्थिक बोझ क्यों डाला जा रहा है?




हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय प्रदेश का केवल मात्र एक तकनीकी विश्वविद्यालय लेकिन अगर हम इसकी हालत देखे तो यह विश्वविद्यालय छात्रों द्वारा दी गई फीस पर ही चलता है यानी सेल्फ फाइनेंस कोर्स इस विश्वविद्यालय में चलाए जाते हैं ।



इतनी भारी भरकम फीस विद्यार्थियों से ली जाती है लेकिन उनको बदले में क्या सुविधा दी जाती हैं यह एक चिंता का विषय है।
एबीवीपी ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि विद्यार्थियों की समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए और विश्वविद्यालय में आवश्यक पदों को शीघ्र भरा जाए। यह हिमाचल सरकार की सफलता है हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री व तकनीकी शिक्षा मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि उनकी सरकार विद्यार्थियों को सुविधा देने में असमर्थ रही है।
आज पूरे हिमाचल प्रदेश में विद्यालय थी सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहा है परिषद ने चेतावनी दी कि मांगों की अनदेखी होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।


















