



नई-दिल्ली:- देश में चीनी के दाम तीन माह में 40% (19 रु./किग्रा) तक बढ़ चुके हैं। इसी दौरान गुड़ 24%, चावल 16% और मक्के का आटा 11% तक महंगा हुआ। जबकि पिछले एक दशक से इन उत्पादों के दामों में कोई उल्लेखनीय बढ़ोतरी नहीं हुई थी।

25 लाख टन चीनी लायक गन्ना एथेनॉल में गया; चीनी 40% महंगी



एथेनॉल बनाने में गन्ना, मक्का, चावल की टुकड़ी और खराब अनाज के इस्तेमाल में पिछले एक साल में आई तेजी को इसका मुख्य कारण माना जा रहा है।






मक्के का आटा 11% और चावल 16% तक महंगा


खराब अनाज से पशु आहार और पॉल्ट्री फीड बनती थी। उपलब्धता घटने से पशु आहार 8-10% महंगा हुआ है। दूध और अंडे की कीमतें भी 5-10% तक बढ़ चुकी हैं। सरकारी मानकों के अनुसार एथेनॉल में 67% मक्का, किनकी चावल और खराब अनाज इस्तेमाल होता है।



मिलों का ओपनिंग स्टॉक पिछले साल 47 लाख टन था, इस बार 32 लाख टन


2026-27 में गन्ने के कुल उत्पादन का अनुमान 46.3 करोड़ टन है। 3.36 करोड़ टन चीनी उत्पादन का अनुमान है, जो पिछले वर्ष से 12% ज्यादा है। 2025-26 में पेराई से पहले मिलों का ओपनिंग स्टॉक 47 लाख टन था। 2026-27 के सीजन से पहले स्टॉक 32 लाख टन बचा है। वजह 2025 26 में 25 लाख टन चीनी लायक गन्ना शीरा एथेनॉल बनाने में लगा।
शेष 33% गन्ने और इसके उत्पाद प्रयोग होते हैं
इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन के महानिदेशक दीपक बलानी कहते हैं कि चीनी की कमी नहीं है। यह तेजी सट्टेबाजी और पेनिक बाइंग का नतीजा है। सीजन खत्म होने तक क्लोजिंग स्टॉक 35-40 लाख टन रहेगा।
हालांकि, कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के राष्ट्रीय मंत्री शंकर ठक्कर ने कहा, ‘हम 3 साल से कह रहे हैं कि चीनी के गन्ने का एथेनॉल में उपयोग मुश्किलें खड़ी करेगा। अब वही समय आ गया है। सरकार चीनी आयात की तैयारी में है।


















