अनियमितताओं और नियम-विरुद्ध CAS पदोन्नति का बोझ छात्रों की जेब पर: एस एफ आई

शिमला/विवेकानंद वशिष्ठ :-   एस एफ आई हिमाचल प्रदेश ने प्रेस विज्ञप्ति करते हुए कहा कि एस एफ आई हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय व तमाम महाविद्यालयों में फीस बढ़ोतरी के खिलाफ लगातार लड़ रही है। मार्च 2026 में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की कार्यकारणी परिषद द्वारा फ़ीस बढ़ोतरी का तुगलकी फरमान छात्रों पर थोपा जाता है।

फर्जी प्रोफेसर भर्ती पर रोक ओर फ़ीस बढ़ोतरी के खिलाफ: एस एफ आई

जिसके खिलाफ एस एफ आई लगातार आंदोलन कर रही है। एस एफ आई का सीधा मानना है हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला एक “राज्य द्वारा वित्तपोषित विश्वविद्यालय” है। जिसकी फंडिंग ओर उसका संचालन करना राज्य सरकार का कार्य है।

 

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) में छात्रों पर थोपी गई फीस वृद्धि का मुद्दा अब विश्वविद्यालय प्रशासन के भीतर चल रही कथित वित्तीय अनियमितताओं, अवैध CAS पदोन्नति और वरिष्ठता में हेरफेर से सीधा जुड़ गया है।

 

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपति प्रो. महावीर सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए स्पष्ट किया है कि प्रशासन अपनी वित्तीय और प्रशासनिक नाकामियों तथा नियम-विरुद्ध दिए गए वित्तीय लाभों का आर्थिक बोझ छात्रों की फीस बढ़ाकर वसूलना चाहता है।

 

SFI ने मांग की है कि विश्वविद्यालय में हुए इन सभी घोटालों की स्वतंत्र न्यायिक जांच की जाए और फीस बढ़ोतरी का तुगलकी फरमान तुरंत प्रभाव से वापिस लिया जाए।

प्रेस विज्ञप्ति के प्रमुख बिंदु और गंभीर सवाल:
वरिष्ठता (Seniority List) में बड़ा विरोधाभास: कुलसचिव (Registrar) द्वारा 7 जुलाई 2021 को जारी सूची के अनुसार PG Centre के 31 Associate Professors में Dr. Rajinder Verma का नाम चौथे स्थान पर था और उनकी जॉइनिंग 13 जून 2017 दर्ज थी।

 

लेकिन 15 नवंबर 2025 की सूची में अचानक उन्हें 8 अक्टूबर 2015 से Professor के रूप में पदोन्नति देकर 36वें स्थान पर वरिष्ठता दे दी गई। सवाल यह है कि यदि Associate Professor के रूप में जॉइनिंग 2017 की है, तो 2015 की तारीख किस नियम, UGC Regulation या कानूनी आधार पर तय की गई?

 

गलत पदोन्नति का वित्तीय बोझ छात्रों पर क्यों?: किसी व्यक्ति को नियम-विरुद्ध पदोन्नति, उच्च वेतन, एरियर (Arrears) या भत्ते (Allowances) देने से विश्वविद्यालय के बजट पर स्थाई वित्तीय भार पड़ता है। यदि ऐसी अनियमितताएं कई मामलों में हुई हैं, तो उस बजटीय घाटे की भरपाई के लिए छात्रों की फीस बढ़ाना सरासर अन्याय है।

 

शिक्षकों की नियम-विरुद्ध पदोन्नति का भुगतान छात्र क्यों करें?
प्रशासनिक पदों और निर्णयों की निष्पक्ष जांच: गलत वरिष्ठता के आधार पर दिए गए प्रशासनिक पदों (Dean, Head आदि) और उस दौरान लिए गए सभी नीतिगत/प्रशासनिक निर्णयों की वैधानिकता की समीक्षा की जाए।

 

कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी सुविधाओं का दुरुपयोग: Pro-Vice-Chancellor (PVC) के पद पर कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी संबंधित व्यक्ति किस अधिकार या आदेश के तहत विश्वविद्यालय के कार्यालय, वाहन, स्टाफ और अन्य संसाधनों का उपयोग कर रहा है? विश्वविद्यालय प्रशासन इसका आदेश और वैधानिक आधार सार्वजनिक करे।

 

कुलपति (VC) प्रो. महावीर सिंह की चुप्पी पर सवाल: इतने गंभीर मामलों और SFI द्वारा सौंपे गए लिखित ज्ञापन के बावजूद कुलपति का मौन रहना प्रशासनिक कमजोरी और जवाबदेही से भागने को दर्शाता है। यदि सब कुछ नियमानुसार हुआ है, तो VC प्रशासन दस्तावेज सार्वजनिक करे; अन्यथा दोषी व्यक्तियों पर कार्रवाई करे।

SFI की मुख्य मांगें:
CAS Promotions, सीनियरिटी निर्धारण और अवैध नियुक्तियों की स्वतंत्र न्यायिक जांच (Judicial Audit) की जाए।
गलत वित्तीय लाभों की रिकवरी (Recovery): UGC नियमों का उल्लंघन कर दी गई पदोन्नतियों की जांच कर गलत तरीके से बांटे गए पैसों की वसूली की जाए।
PVC सुविधाओं का हिसाब: कार्यकाल समाप्त होने के बाद दी जा रही सुविधाओं के वैधानिक आधार और खर्च का पूरा ब्योरा सार्वजनिक किया जाए।
छात्रों का आह्वान:
SFI नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह किसी व्यक्ति विशेष से लड़ाई नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय में पारदर्शिता, नियम-कानून और छात्रों के सस्ती-गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अधिकार की लड़ाई है।

 

यदि प्रशासन ने न्यायिक जांच के आदेश नहीं दिए और फीस वृद्धि वापस नहीं ली, तो छात्र संघ विश्वविद्यालय स्तर पर उग्र आंदोलन छेड़ेगा। एस एफ आई हिमाचल प्रदेश सरकार को भी सचेत करना चाहती है कि यदि तुरंत प्रभाव से फीस बढ़ोतरी का तुगलकी फरमान वापस नहीं लिया गया तो एस एफ आई विधानसभा की ओर कुंच करेगी।

एस एफ आई हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी
राज्य अध्यक्ष अनिल ठाकुर राज्य सचिव सनी सेक्टा

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