



हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय हमीरपुर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।


इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सतीश कुमार फोतेदार ने उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आत्महत्या की रोकथाम, मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता तथा जरूरतमंद व्यक्तियों की सहायता करने की शपथ दिलाई।



इस अवसर पर डॉ. सतीश कुमार फोतेदार ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां किसी भी व्यक्ति को हो सकती हैं, चाहे वह किसी भी वर्ग से संबंधित हो।







अक्सर लोग अकेलेपन, डर या संकोच के कारण अपनी परेशानियों को चुपचाप सहते रहते हैं और मदद मांगने से हिचकिचाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में परिवार और समाज का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है।


उन्होंने अभिभावकों से विशेष रूप से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों के साथ अधिक से अधिक समय बिताएं, उनकी बातें ध्यानपूर्वक सुनें और घर में ऐसा सकारात्मक एवं सहयोगात्मक माहौल बनाएं, जहां बच्चे अपनी परेशानियां खुलकर साझा कर सकें।



उन्होंने कहा कि बच्चों को डांटने के बजाय समझाना चाहिए तथा उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनना चाहिए। इस अवसर पर जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अजय अत्री ने कहा कि किशोरावस्था में बच्चे भावनात्मक एवं सामाजिक दबाव के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं।


ऐसे में अभिभावकों को बच्चों के व्यवहार और संगति पर सकारात्मक तरीके से ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें और उन्हें रिश्तेदारों या अन्य बच्चों के साथ तुलना करने से बचें।
बच्चों को पीयर प्रेशर से निपटने के लिए सही मार्गदर्शन देना आवश्यक है, ताकि वे किसी गलत सूचना या नकारात्मक प्रभाव के कारण गलत निर्णय न लें।
उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ विश्वास और संवाद का रिश्ता मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि वे किसी भी परेशानी की स्थिति में सबसे पहले अपने माता-पिता, शिक्षक या किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात कर सकें।
डॉ. सतीश कुमार फोतेदार ने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि परिवार, शिक्षण संस्थानों और पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने सभी से आह्वान किया कि वे मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील बनें और जरूरतमंद व्यक्ति को अकेला महसूस न होने दें।
उन्होंने कहा, “इस विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर आइए हम सभी एकजुट होकर ऐसे समुदाय के निर्माण का संकल्प लें, जहां किसी भी व्यक्ति को अपने सबसे कठिन दौर का अकेले सामना न करना पड़े।” और कहा की आइए हम सब मिलकर आत्महत्या के विमर्श को चुप्पी से बातचीत कलंक से समर्थन और निराशा से आशा में बदलें इस अवसर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी डा. नेहा पटियाल सहित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने आत्महत्या की रोकथाम तथा मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।











