



हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- हमारा अपना क्या है, पहले यह जानना जरूरी है। जब तक हमें अपने रीति रिवाज, संस्कति, धर्म के बारे में जानकारी नहीं होगी, तब तक हमें उस पर गर्व करने में भी संकोच होता रहेगा। इसलिए पहले हमारा अपना क्या है, इसके बारे में जानकारी होना जरूरी है।

हमीरपुर में विजय दशमी महोत्सव में स्वयंसेवकों को सम्बोधित करते हुए बोले उतर क्षेत्र बौद्धिक प्रमुख




तभी उस पर गर्व किया जा सकता है। यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र बौद्धिक प्रमुख हरीश कुमार ने हमीरपुर में विजय दशमी महोत्सव में स्वयंसेवकों को सम्बोधित करते हुए कही।







मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हमीरपुर नगर द्वारा विजय दशमी महोत्सव पथ संचलन और शस्त्र पूजन के साथ मनाया। समारोह में ठाकुर रामसिंह इतिहास शोध संस्थान नेरी के महासचिव भूमिदत्त शर्मा ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की, जबकि आरएसएस के उतर क्षेत्र बौद्धिक प्रमुख हरीश चंद्र मुख्यवक्ता रहे।




इससे पूर्व हमीरपुर नगर में स्वयंसेवकों ने पथ संचलन निकाला। विजय दशमी महोत्सव समारोह गौत्तम फ़ार्मेसी कॉलेज परिसर में आयोजित किया गया।





शस्त्र पूजन के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ। मुख्यातिथि ने कहा कि शताब्दी वर्ष में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने पंच परिवर्तन को लेकर समाज में जनजागरण किया, जिसके परिणाम आने वाले समय में देखने को मिलेंगे।


उन्होंने कहा कि पंच परिवर्तन को हर व्यक्ति को अपने आचरण में लाना होगा, तभी राष्ट्र निर्माण में सभी की भूमिका होगी। वहीं, मुख्यवक्ता ने विजय दशमी के महत्व और संघ स्थापना को लेकर डॉ केशव राव बलिराम हेडगेवार के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।
इसके बाद उन्होंने पंच परिवर्तन के स्व बोध और कुटुंब प्रबोधन पर विस्तारपूर्वक विचार रखे। उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रांताओं के कारण हमारे स्व बोध को काफी नुकसान हुआ है जिसे जागृत करने के लिए संघ पिछले 100 वर्ष के समाज में कार्य कर रहा है।
आज समाज में उसके बदलाव देखने को भी मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 इस दिशा में सबसे बड़ी पहल है।
जिसके परिणाम आने में अभी समय लगेगा। उन्होंने भारत की संयुक्त परिवार परंपरा पर बोलते हुए कहा कि सप्ताह में कम से कम एक दिन पुरे परिवार को भजन, भोजन और संयुक्त रूप से संवाद करना चाहिए।

जिसमें परिवार के सभी सदस्यों को बात रखनी चाहिए। अंत में उन्होंने कहा कि सभी को अपने आचरण व्यवहार में पंच परिवर्तन लाने की जरूरत है, यही समय की जरूरत है। आज पूरा विश्व भारत की ओर देख रहा है।
पूरे विश्व में भारत की आपने आध्यात्मिक चिन्तन से परिवर्तन ला सकता है। संघ के विजय दशमी महोत्सव में पूर्ण गणवेश के साथ 148 स्वयंसेवकों सहित लगभग 300 लोग उपस्थित रहे।




