



आलमपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल आलमपुर, जिला काँगड़ा, हिमाचल प्रदेश में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के तत्वावधान में हिंदी अध्यापकों के लिए आयोजित दो दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का समापन 25 अक्तूबर 2026 को प्रेरणादायक वातावरण में हुआ।

24 अक्तूबर को प्रारंभ हुई इस कार्यशाला में 60 से अधिक अध्यापकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और हिंदी शिक्षण को अधिक रोचक, प्रभावशाली एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाने के लिए विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता की।



कार्यशाला के दोनों दिनों में हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें सभी प्रतिभागियों ने आहुति डालकर सकारात्मक ऊर्जा, ज्ञान और सद्भावना की कामना की।






कार्यशाला में सीबीएसई की वरिष्ठ रिसोर्स पर्सन पुष्पा ठाकुर एवं डॉ. मुकेश कुमार तथा मेजबान विद्यालय की रिसोर्स पर्सन राशी हाजरी ने शिक्षकों का मार्गदर्शन किया।



दो दिवसीय कार्यशाला के दौरान रिसोर्स पर्सन ने हिंदी पाठ्यक्रम–कोर्स ‘अ’ (माध्यमिक स्तर) के अंतर्गत नवीन शिक्षण पद्धतियों, गतिविधि-आधारित शिक्षण तथा अनुभवात्मक अधिगम के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।





शिक्षकों ने अनेक रोचक एवं ज्ञानवर्धक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए नए शिक्षण कौशलों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।


इन गतिविधियों के माध्यम से उन्होंने सीखा कि किस प्रकार विद्यार्थियों को शिक्षण प्रक्रिया से जोड़कर कक्षा-कक्ष के वातावरण को अधिक संवादात्मक, रचनात्मक और प्रभावशाली बनाया जा सकता है।
कार्यशाला के समापन अवसर पर रिसोर्स पर्सन ने सभी अध्यापकों से आह्वान किया कि वे कार्यशाला के दौरान सीखी गई गतिविधियों एवं नवीन शिक्षण तकनीकों को नियमित रूप से अपनी कक्षाओं में अपनाएँ।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखने के स्थान पर उन्हें गतिविधियों, चर्चा, कल्पनाशीलता एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से सीखने के अधिक अवसर प्रदान किए जाने चाहिए।
इससे विद्यार्थियों में हिंदी विषय के प्रति रुचि विकसित होने के साथ-साथ उनकी तार्किक क्षमता, आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति कौशल में भी वृद्धि होगी।

विद्यालय के प्रधानाचार्य सुरजीत कुमार राणा ने अपने संदेश में कहा कि इस प्रकार की क्षमता संवर्धन कार्यशालाएँ शिक्षकों के ज्ञान, कौशल एवं शिक्षण दक्षता को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
उन्होंने सभी रिसोर्स पर्सन एवं प्रतिभागी अध्यापकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि कार्यशाला से प्राप्त अनुभवों को कक्षा-कक्ष में प्रभावी रूप से लागू करना ही इस आयोजन की वास्तविक सफलता है।
उन्होंने शिक्षकों को निरंतर सीखते रहने, नवीन शिक्षण तकनीकों को अपनाने तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित भाव से कार्य करने के लिए प्रेरित किया।




