जातीय समीकरण तय करती रही है पहाड़ की राजनीति, जातिवाद के नाम पर जमकर होता है ध्रूवीकरण

हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ  :-  हिमाचल प्रदेश की राजनीति में जातिगत समीकरणों का विशेष ख्याल रखा जाता है। टिकट बंटवारे से लेकर मतदान करने तक इस बात का बखूबी ख्याल रखा जाता है। खास बात है कि राजनीतिक दल और मतदाता दोनों ही इस बात का ख्याल रखता है। हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र में आज तक राजपूत नेताओं का ही दबदबा रहा है। 1977 से लेकर इस हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र में राजपूत नेता ने ही इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है।

 

हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र में 39% राजपूत 31% ब्राह्मण 25% अनुसूचित जाति और 7% ओबीसी को अन्य लोग आते हैं।

 

गौर रहे कि पिछले विधानसभा चुनाव में दोनों राष्ट्रीय दलों ने राजपूत नेताओं को यहां से टिकट दी थी, भारतीय जनता पार्टी की ओर से पूर्व विधायक नरेंद्र ठाकुर ने यहां से चुनाव लड़ा था वहीं कांग्रेस की ओर से पुष्पेंद्र वर्मा यहां चुनाव मैदान में थे। इन दोनों को हराकर आशीष शर्मा यहां पर चुनाव जीत गए थे। जानकारों का कहना है कि राजपूत वोटों का बंटवारा होने का सीधा लाभ उस समय आजाद ब्राह्मण, प्रत्याशी आशीष शर्मा को मिला था। इस बार भारतीय जनता पार्टी से पूर्व विधायक आशीष शर्मा का टिकट कंफर्म हो गया है।

 

वही यदि कांग्रेस यहां किसी राजपूत नेता को चुनावी मैदान में उतारती है तो जाति समीकरण कांग्रेस की पक्ष में हो सकता है। गौरतलब है के लोकसभा चुनाव के ट्रेंड को देखें तो उसके अनुसार विधानसभा क्षेत्र हमीरपुर में वोट अनुपात पुरुषों का‌25539, महिलाओं का 28561 और कुल वोट 54101 संख्या रही।

अगर रुझान इसी प्रकार रहे तो एक बार फिर से महिलाएं निर्णायक जीत के लिए महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगी। दिलचस्प देखना यह होगा की महिलाएं किसको अपना वोट रूपी आशीर्वाद देकर विजय बनाएंगी।

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