राजराजेश्वरी शिक्षा महाविद्यालय मनसुई में दिया विस्तार व्याख्यान 

हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:-  राजराजेश्वरी शिक्षा महाविद्यालय मनसुई भोटा में विस्तार व्याख्यान की श्रृंखला को जारी रखते हुए डॉक्टर मनीष कुमार ने व्याख्यान दिया। उनके व्याख्यान का विषय देवनागरी लिपि की उत्पत्तिए नामकरणए वैज्ञानिकताए दोष एवं सुधार रहा।

 

सर्वप्रथम डॉ सविता ने डॉ मनीष कुमार को स्वागत के साथ मंच पर आमंत्रित किया। डॉ मनीष कुमार ने बताया की भाषा लिपि से पहले आई है तथा लिपि की उत्पत्ति भाषा के पश्चात हुई है।

विश्व की प्राचीनतम लिपियां में वर्ण सहित लिपियां और वर्ण रहित लिपियां रही हैं और प्राचीन भारतीय लिपियों में खरोष्ठी लिपि तथा ब्राह्मी लिपि रही है। ऐसी मान्यता है कि ब्राह्मी लिपि ब्रह्मा के द्वारा दी गई हैए ब्राह्मी लिपि ने उत्तरी शैली तथा दक्षिणी शैली की लिपियां की उत्पत्ति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

 

योगी आचार्य विनोबा भावे ने हिंदी की देवनागर को लोकनगरी का नाम दिया। देवनागरी लिपि में 40 चिन्ह है जबकि अंग्रेजी की रोमन लिपि में 26 चिन्ह है ! देवनागरी लिपि एकमात्र ऐसी लिपि है जिसमें आधे शब्दों का प्रयोग भी किया जाता है।

 

साथ ही साथ हिंदी भाषा टेक्निकल भाषा बन गई है। लेकिन देवनागरी लिपि में गुना के साथ.साथ कुछ दोष भी है जैसे .लेखनए टंकण तथा मुद्रण में असुविधाए स्वरों के स्थान पर उनके चिन्हो का प्रयोग आदि है।

 

देवनागरी लिपि में सुधार के लिए वर्णमाला में मानकीकरण की आवश्यकता है। तकनीकी और वैज्ञानिक शब्दकोषों का निर्माण सॉफ्टवेयर का अधिक प्रयोग तथा व्याकरण और शोधपरक ग्रंथो का लेखन करना जैसे कदम उठाने की जरूरत है।

 

अंत में डॉ मनोज कुमार ने डॉ मनीष का इस तरह की ज्ञानवर्धक विषय पर चर्चा करने के लिए धन्यवाद दिया। इस उपलक्ष्य पर बी. एड. तथा डी. एल. एड. के सभी प्रशिक्षक अध्यापक तथा संपूर्ण स्टाफ उपस्थित रहा।

[post-views]