NH पर बारिश में ही बिछा दी कोलतार, ग्रामीणों ने खोला मोर्चा

मंडी/विवेकानंद वशिष्ठ:-  प्रदेश सरकार के सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर किए जा रहे बड़े-बड़े दावों के बीच मंडी जिले से एक घटना सामने आयी है जो सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

 

राष्ट्रीय राजमार्ग-154 (मंडी–पठानकोट) पर गवाली से घटासनी तक चल रहे अपग्रेडेशन कार्य में तेज बारिश के दौरान ही सड़क पर कोलतार बिछाए जाने का मामला चर्चा में है।

सरकार के दावों पर उठे सवाल

यह मामला इसलिए भी ज्यादा सुर्खियों में है क्योंकि प्रदेश के लोक निर्माण विभाग से जुड़े मंत्री विक्रमादित्य सिंह अक्सर सड़कों की गुणवत्ता और निर्माण कार्यों को लेकर सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते रहे हैं। ऐसे में मंडी से सामने आया यह वीडियो उनके दावों की वास्तविकता पर सवाल खड़े कर रहा है।

बारिश में टारिंग, गुणवत्ता पर संदेह

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण के तय मानकों के अनुसार कोलतार बिछाने का कार्य केवल साफ और सूखे मौसम में ही किया जाना चाहिए। बारिश या नमी के दौरान किया गया काम टिकाऊ नहीं होता।

ग्रामीणों के मुताबिक पिछले तीन हफ्तों तक मौसम पूरी तरह साफ रहा, लेकिन उस दौरान निर्माण एजेंसी ने काम नहीं किया। अब जब लगातार बारिश हो रही है, तब जल्दबाजी में टारिंग कर गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है। लोगों ने इसे महज खानापूर्ति बताया है।

रात के अंधेरे में भी निर्माण

मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब कोटरोपी और कसयाण नाला के पास कलवर्ट निर्माण कार्य रात के समय किए जाने के आरोप सामने आए। ग्रामीणों का दावा है कि अंधेरे में कंक्रीट डाली जा रही है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर और संदेह गहरा गया है।

लोगों का आरोप है कि मौके पर न तो एनएचएआई का कोई अधिकारी नजर आता है और न ही संबंधित विभाग की निगरानी दिखती है, जिससे काम मनमाने तरीके से किया जा रहा है।

ग्रामीणों ने खोला मोर्चा

घटिया निर्माण के खिलाफ ग्रामीण अब खुलकर सामने आ गए हैं। दर्जनों लोगों ने एसडीएम पद्धर को लिखित शिकायत सौंपते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे सड़कों पर उतरकर धरना-प्रदर्शन करेंगे।

प्रशासन का क्या कहना है…?

एसडीएम पद्धर सुरजीत सिंह ने शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि मामले की जांच करवाई जाएगी। यदि निर्माण में मानकों की अनदेखी पाई जाती है तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अब बड़ा सवाल यही है कि सड़कों की गुणवत्ता को लेकर दावे करने वाली सरकार इस लापरवाही पर कितना कड़ा रुख अपनाती है या यह मामला भी बारिश के पानी की तरह बह जाएगा।

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