




हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- हिम अकादमी पब्लिक स्कूल, विकास नगर में 10 मई को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के तत्वावधान में “विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण को बढ़ावा” विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का प्रभावशाली आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में उपस्थित स्रोत व्यक्तियों का विद्यालय परिवार द्वारा गर्मजोशी से स्वागत किया गया, जिसमें विद्यालय प्रबंधन से चेयरपर्सन आर. सी. लखनपाल, वाइस चेयरपर्सन सी. पी. लखनपाल, अकादमिक प्रधानाचार्या डॉ. हिमांशु शर्मा, उप प्रधानाचार्य अश्वनी कुमार एवं शालिनी सहोत्रा विशेष रूप से उपस्थित रहे।



कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन तथा सकारात्मक शिक्षण वातावरण के प्रति जागरूक करना था, ताकि विद्यालयों में ऐसा वातावरण तैयार किया जा सके जहाँ विद्यार्थी स्वयं को सुरक्षित, प्रेरित एवं आत्मविश्वासी अनुभव करें।






कार्यशाला में मुख्य स्रोत व्यक्ति के रूप में राकेश कुमार, प्रवक्ता रसायन विज्ञान तथा शैली गुलाटी, कला अध्यापिका सामाजिक विज्ञान उपस्थित रहे।


दोनों विशेषज्ञों ने अपने अनुभव एवं विचार साझा करते हुए मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। इस कार्यशाला में विद्यालय के लगभग 60 शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा विभिन्न गतिविधियों एवं विचार-विमर्श के माध्यम से महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कीं।


स्रोत व्यक्ति राकेश कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा, परीक्षा का दबाव, सामाजिक अपेक्षाएँ तथा तकनीकी प्रभाव मानसिक तनाव का प्रमुख कारण बन रहे हैं। ऐसे समय में शिक्षक केवल शिक्षा प्रदान करने वाले नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के मार्गदर्शक, प्रेरणास्रोत एवं सहयोगी भी होते हैं।


उन्होंने शिक्षकों को विद्यार्थियों की भावनाओं को समझने, उनकी समस्याओं को सुनने तथा उन्हें सकारात्मक मार्गदर्शन देने की आवश्यकता पर बल दिया।
श्रीमती शैली गुलाटी ने विभिन्न गतिविधियों एवं उदाहरणों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को सरल एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, अनुशासन, सहनशीलता, सहयोग की भावना तथा सकारात्मक सोच विकसित करना अत्यंत आवश्यक है।


उन्होंने तनाव प्रबंधन, समय प्रबंधन तथा भावनात्मक संतुलन बनाए रखने के व्यावहारिक उपाय भी साझा किए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि विद्यालयों में नियमित रूप से परामर्श सत्र, समूह गतिविधियाँ एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए, जिससे विद्यार्थियों का मानसिक एवं सामाजिक विकास सुदृढ़ हो सके।

कार्यशाला के दौरान समूह चर्चा, गतिविधि आधारित सत्र, विचार-विमर्श तथा प्रस्तुतीकरण आयोजित किए गए, जिनमें शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए विद्यार्थियों के मानसिक एवं भावनात्मक विकास को मजबूत बनाने हेतु अनेक उपयोगी सुझाव भी प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का वातावरण अत्यंत ज्ञानवर्धक, सकारात्मक एवं प्रेरणादायक रहा।





