



हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- 𝗖𝗵𝗮𝗻𝗮𝗸𝘆𝗮 𝗧𝗵𝗲 𝗚𝘂𝗿𝘂 —हाल ही में एक बड़ी नामी कोचिंग की 𝗥𝗲𝘄𝗮𝗿𝗱 𝗦𝗰𝗵𝗲𝗺𝗲 चर्चा में रही। सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी, सवाल उठे और प्रतिक्रियाएँ आईं।

पर जो लोग कोचिंग इंडस्ट्री को भीतर से जानते हैं, उनके लिए यह कोई नई कहानी नहीं है।



सच्चाई यह है कि आजकल अधिकांशत: बड़े संस्थानों में अलग-अलग नामों से ऐसी टीमें काम करती हैं—𝗧𝗮𝗹𝗲𝗻𝘁 𝗦𝗲𝗮𝗿𝗰𝗵, 𝗔𝗰𝗮𝗱𝗲𝗺𝗶𝗰 𝗢𝘂𝘁𝗿𝗲𝗮𝗰𝗵, 𝗕𝘂𝘀𝗶𝗻𝗲𝘀𝘀 𝗗𝗲𝘃𝗲𝗹𝗼𝗽𝗺𝗲𝗻𝘁, 𝗦𝗰𝗵𝗼𝗹𝗮𝗿𝘀𝗵𝗶𝗽 𝗖𝗲𝗹𝗹 या फिर अन्य किसी नाम से।







याद रखिए, इनका उद्देश्य पढ़ाना नहीं होता…


इनका उद्देश्य होता है देश या प्रदेश भर के मेधावी विद्यार्थियों की पहचान करना, उनसे संपर्क बनाना और उन्हें अपने संस्थान से जोड़ना।



देखिए प्रतिस्पर्धा बुरी नहीं है।


लेकिन जब किसी संस्थान की पहचान “कितने टॉपर लाए” से बनने लगे, बजाय इसके कि “कितने टॉपर बनाए”, तब शिक्षा के मूल उद्देश्य पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
𝗖𝗵𝗮𝗻𝗮𝗸𝘆𝗮 𝗧𝗵𝗲 𝗚𝘂𝗿𝘂 में हमारा मानना है कि —

हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि वह छात्र नहीं है जो पहले से टॉपर था।
हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि वह छात्र है जो सामान्य शुरुआत से असाधारण मंज़िल तक पहुँचा।

हमारे लिए असली सफलता यह नहीं कि किसी और की मेहनत का परिणाम अपने पोस्टर पर लगा दिया जाए।
हमारे लिए सफलता यह है कि एक विद्यार्थी हमारे मार्गदर्शन, हमारी टीम की मेहनत और अपनी लगन से नई पहचान बनाए।
पोस्टर पर दिखने वाले चेहरे नहीं, उसके पीछे का संघर्ष भरी यात्रा हमारी असली पहचान है।
स्कालरशिप के नाम पर टैलेंट को 𝗣𝗼𝗮𝗰𝗵 करना और उसका इस्तेमाल दूसरे टैलेंट को खींचने के लिए करना 𝗦𝘁𝗿𝗮𝘁𝗲𝗴𝗶𝗰𝗮𝗹𝗹𝘆 हो सकता है आज सही लगे पर देश और ऐसी परवरिश में पले बच्चे के भविष्य के लिए तो कतई सही नहीं हो सकता । इस परवरिश में पला व्यक्ति सामान्यत: आगे चलकर अपने कार्य क्षेत्र में भी वैसी ही प्रवृति के साथ काम करता है जो देश और दुनिया के लिए कभी सही नहीं होता और साथ ही समाज के प्राकृतिक संतुलन को भी खराब करता है।
हम सभी अभिभावकों से अपील करते हैं कि आप अपने बच्चे के लिए अच्छे शिक्षक व मार्गदर्शक चुनिये न कि लालच भरे लुभाभने ऑफर । अगर आज आपने लालच वश अपने होनहार के लिए ऐसे मार्गदर्शक चुन लिए जो आपके बच्चे को लालच और अनैतिकता के मार्ग पर ले जाएँ तो याद रखना ऐसा बच्चा कल इसी लालच और अनैतिकता के वश में अपने माँ और पिता का भी अहित करने से भी नहीं चूकेगा ।
किसी का आपको ऑफर करना उसका काम है पर उस ऑफर को पूरी तरह से जांच पड़ताल कर स्वीकार या अस्वीकार करना आपके विवेक और प्रवृति पर निर्भर करता है ।
अपने बच्चे के लिए ऐसे शिक्षक और मार्गदर्शक चुनिये जो आपके बच्चे को उसके आज से बेहतर बनाने में समर्थ हों।
बच्चो, आप भी समझदार रहिए। किसी भी परलोभन में न आयें और ऐसे लोगों का बहिष्कार करें जो आपको परलोभन देकर अनैतिकता के रास्ते पर ले जाएँ । संस्कारी, गुणवतापूर्ण, ज्ञानवर्धक, कौशल और स्वाभिमान बड़ाने वाली शिक्षा के मार्ग का चुनाव करें ताकि भविष्य में आप अपने मन मुताविक कार्य कर पाएँ और खुशी-खुशी अपना जीवन बिताएँ । कोई आपका मोल भाव न कर पाए, कोई आपको खरीद न पाए ।
आइए, ऐसी शिक्षा संस्कृति बनाएं जहाँ होर्डिंग्स पर “𝗣𝗼𝗮𝗰𝗵𝗲𝗱 𝗧𝗮𝗹𝗲𝗻𝘁” नहीं 𝗪𝗲𝗹𝗹 “𝗖𝗼𝗮𝗰𝗵𝗲𝗱 𝗧𝗮𝗹𝗲𝗻𝘁” दिखाई दे।

















