“सेवा का कोई भूगोल नहीं होता, जहाँ पीड़ा पुकारती है, वहाँ हम पहुँचते हैं”: डाॅ. सुरेंद्र सिंह डोगरा 

जैसिंहपुर/कांगड़ा:-  इंसानियत तब सबसे अधिक सुंदर लगती है, जब किसी अनजान की पीड़ा को अपना समझकर उसके द्वार तक पहुँचा जाए। ऐसा ही एक प्रेरणादायी उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब ग्राम टिकरी, पंचायत बाग कुलजा (जैसिंहपुर, जिला कांगड़ा) के 73 वर्षीय श्री सुख राम ने निस्वार्थ भाव सेवा संगठन से स्वास्थ्य सहायता की गुहार लगाई।

73 वर्षीय बुजुर्ग की पुकार पर ड्यूटी के बाद भी घर पहुँचे डॉ. सुरिंद सिंह डोगरा, निःशुल्क उपचार व दवाइयाँ देकर निभाया मानवता का धर्म

 

संदेश मिलते ही संगठन ने बिना किसी औपचारिकता के सेवा का हाथ बढ़ाया। अपने नियमित सरकारी दायित्व पूरे करने के बाद भी डॉ. सुरिंद सिंह डोगरा ने संगठन के हमीरपुर इकाई के जिला कार्यकारिणी सदस्य श्री पंकज धीमान के साथ स्वयं सुख राम के घर पहुँचकर उनका विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया। उपचार के साथ उन्हें एक माह की आवश्यक दवाइयाँ भी निःशुल्क उपलब्ध कराई गईं।

 

डॉ. डोगरा ने आश्वस्त किया कि यदि भविष्य में भी किसी प्रकार की चिकित्सकीय आवश्यकता हुई, तो संगठन और वे स्वयं हरसंभव सहयोग के लिए सदैव तत्पर रहेंगे।
इस अवसर पर डॉ. सुरिंद सिंह डोगरा ने कहा,
“हमारी सेवा किसी एक जिले या क्षेत्र की सीमाओं में बंधी नहीं है। जहाँ भी कोई जरूरतमंद सहायता के लिए पुकारेगा, वहाँ तक पहुँचना हमारी प्राथमिकता और मानवता के प्रति हमारा कर्तव्य है। सेवा ही हमारा संकल्प है और यही हमारी सबसे बड़ी पहचान है।”

 

निस्वार्थ भाव सेवा संगठन का मानना है कि समाज में सच्ची सेवा वही है, जो बिना किसी स्वार्थ, प्रचार या भेदभाव के पीड़ित और असहाय व्यक्ति तक पहुँचे। संगठन का संकल्प है कि वह हर जरूरतमंद तक स्वास्थ्य, सहयोग और संवेदनाओं की यह श्रृंखला निरंतर पहुँचाता रहेगा।
“जब संवेदनाएँ कदमों से चलकर किसी के घर तक पहुँचती हैं, तभी सेवा अपने वास्तविक अर्थ को प्राप्त करती है।”

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