शिक्षा मंत्री, धर्मेंद्र प्रधान ने दिया: “इस्तीफा”

नई-दिल्ली/विवेकानंद वशिष्ठ:-  मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट (NEET-UG) में हुई कथित धांधली और दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के भारी विरोध प्रदर्शन के बीच एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने परीक्षा में हुई गड़बड़ियों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंप दिया है।

 

शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर जारी एक विस्तृत बयान में  प्रधान ने स्पष्ट किया कि यह उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है, बल्कि देश की युवाशक्ति और उनका भविष्य उनके लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।

 

‘राष्ट्र विरोधी ताकतें न उठाएं फायदा’

जंतर-मंतर पर चल रहे धरने पर चिंता व्यक्त करते हुए पूर्व शिक्षा मंत्री ने कहा कि वे नहीं चाहते कि राष्ट्र विरोधी ताकतें इस स्थिति का अनुचित लाभ उठाएं और देश की एकता को कोई नुकसान पहुंचे।

 

उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे भ्रम के कुचक्र में न फंसें और अपना पूरा ध्यान पढ़ाई तथा करियर बनाने पर केंद्रित करें। उन्होंने कहा, “मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूं।”

 

नीट परीक्षा में बड़ा बदलाव

अपने त्यागपत्र के साथ ही उन्होंने छात्रों के हित में एक अहम घोषणा भी की। उन्होंने बताया कि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए अगले वर्ष से नीट की परीक्षा पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित (Computer-Based Test – CBT) मोड में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।

 

सरकार की कार्रवाई का किया बचाव

अपने कार्यकाल के दौरान उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि 3 मई 2026 को हुई परीक्षा में अनियमितता सामने आने के बाद सरकार ने तुरंत कार्रवाई की थी।

 

मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई और परीक्षा रद्द कर 21 जून को पुनः परीक्षा का सुचारू आयोजन किया गया। उन्होंने 16 जुलाई को आए परिणामों को संतोषजनक बताया, जिसमें कई गरीब और मेधावी छात्रों ने सफलता हासिल की।

 

हालांकि, उन्होंने इस बात पर खेद जताया कि कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को गुमराह करने की कोशिश की, जिससे उनका मन व्यथित हुआ।

 

पत्र के अंत में धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व, सहयोग और मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने भविष्य में भी राष्ट्र सेवा और युवाओं की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए खुद को समर्पित रखने का संकल्प दोहराया है।

 

इस उच्च-स्तरीय इस्तीफे के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शिक्षा मंत्रालय की अहम जिम्मेदारी अब किसे सौंपी जाती है।

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