एमआरएमए 2.0 के अंतर्गत वैज्ञानिक रेशमकीट पालन पर कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ :-  मेरा रेशम मेरा अभिमान (MRMA) 2.0 अभियान के अंतर्गत आज राज्य रेशमकीट पालन केन्द्र, भलवानी, जिला हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश में वैज्ञानिक रेशमकीट पालन पद्धतियों पर कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में किसानों एवं स्थानीय रेशम विभाग के कर्मचारियों सहित कुल 52 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक रेशमकीट पालन, स्वच्छता एवं रोग प्रबंधन तथा शहतूत पत्ती के उचित प्रबंधन के संबंध में व्यावहारिक एवं तकनीकी जानकारी प्रदान करना था। इस दौरान कीटाणुनाशक तैयार करने, रेशमकीट पालन गृह एवं पालन उपकरणों के उचित कीटाणुशोधन, उपयुक्त शहतूत पत्तियों के चयन तथा वैज्ञानिक पत्ती कटाई का व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया।

 

किसानों को रेशमकीट पालन गृह में स्वच्छता बनाए रखने तथा अनुशंसित वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने के महत्व के बारे में भी जागरूक किया गया।

इस अवसर पर मेरा रेशम मेरा अभिमान (MRMA) 1.0 कार्यक्रम में पूर्व में भाग लेने वाले किसानों से फीडबैक भी प्राप्त किया गया। इसका उद्देश्य पूर्व कार्यक्रम की उपयोगिता एवं प्रभाव का आकलन करने के साथ-साथ किसानों द्वारा वैज्ञानिक रेशमकीट पालन तकनीकों को अपनाने में आ रही समस्याओं, चुनौतियों एवं बाधाओं को समझना था।

कार्यक्रम के दौरान ‘हर घर तिरंगा अभियान’ के अंतर्गत राष्ट्रीय ध्वज का प्रदर्शन कर देशभक्ति एवं राष्ट्रीय गौरव की भावना को बढ़ावा दिया गया। प्रतिभागियों ने राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए अभियान में सहभागिता की।

कार्यक्रम में किसानों ने रेशमकीट पालन, शहतूत पत्ती प्रबंधन, कीटाणुशोधन, स्वच्छता तथा अन्य व्यावहारिक विषयों से संबंधित समस्याओं एवं जिज्ञासाओं पर चर्चा की। किसानों को वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने तथा रेशमकीट पालन की दक्षता एवं कोकून उत्पादन में सुधार के लिए अनुशंसित पद्धतियों का पालन करने हेतु प्रेरित किया गया। इस दौरान शहतूत उत्पादन एवं रेशमकीट पालन में उनके अनुभवों, उपलब्धियों तथा नवाचारपूर्ण कृषि पद्धतियों को दर्ज किया गया, ताकि सफल कृषक अनुभवों एवं क्षेत्रीय स्तर पर अपनाई जा रही प्रभावी तकनीकों को व्यापक स्तर पर प्रसारित किया जा सके।
कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक रेशमकीट पालन तकनीकों से जोड़ने, उनकी समस्याओं को समझने तथा MRMA 2.0 अभियान के उद्देश्यों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किया गया।इस अवसर पर केंद्रीय रेशम अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान पंपोर के वैज्ञानिक बी जगदीश वर्मा, अनुसंधान प्रसार केंद्र की तकनीकी सहायक चंद्रकला तथा रेशम विभाग नादौन के रेशम अधिकारी अरविंद मेहता ने किसानों को वैज्ञानिक एवं आधुनिक शहतूत रेशम कीट पालन संबंधी विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्रदान की।

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