मां-बाप के निधन से रोजी-रोटी पर संकट आया तो सुख आश्रय योजना ने दिया सहारा

हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:-  “सफलता की कहानी” माता-पिता की मृत्यु के बाद बेसहारा होने वाले बच्चों और युवाओं के लिए सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने हेतु मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू द्वारा साढे तीन वर्ष पूर्व आरंभ की गई मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना आज प्रदेश भर के हजारों बेसहारा बच्चों एवं युवाओं के लिए बहुत बड़ा सहारा साबित हो रही है।

दुकान खोलने के लिए नितिन को मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत मिले 2 लाख रुपये

इन्हीं बच्चों एवं युवाओं में से एक हैं जिला हमीरपुर के सुजानपुर उपमंडल की ग्राम पंचायत डेरा के गांव टिक्कर के नितिन कुमार।

जी हां, वर्ष 2024 में माता-पिता की एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने के बाद नितिन कुमार पर बहुत बड़ी विपदा आन पड़ी। उस समय नितिन कुमार ने जवानी की दहलीज पर अभी कदम रखा ही था कि मात्र 20 वर्ष की आयु में ही उसके सिर से मां-बाप का साया ही उठ गया।

 

 

तीनों बहनों की शादी हो चुकी थी और अब वह घर में बिल्कुल अकेला ही रह गया। रोजी-रोटी का कोई भी साधन नहीं था। उसके समक्ष जीवन-यापन का संकट खड़ा हो गया। न तो वह अपनी पढ़ाई को जारी रख सकता था और न ही अपने लिए अच्छा रोजगार ढूंढ सकता था। वह सिर्फ भावनात्मक रूप से ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से बुरी तरह टूट चुका था।

ऐसी कठिन परिस्थितियों में नितिन कुमार को स्थानीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना की जानकारी दी और इस योजना का लाभ उठाने के लिए प्रेरित एवं प्रोत्साहित किया।

अपनी तरह की इस अनूठी योजना में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने केवल 18 वर्ष तक के बेसहारा बच्चों ही नहीं, बल्कि 27 साल तक के बेसहारा युवाओं को भी ‘चिल्ड्रन ऑफ स्टेट’ का दर्जा प्रदान करते हुए इनकी सही देखभाल एवं सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित किया है।

 

 

इस योजना में बेसहारा बच्चों एवं युवाओं के लिए 27 वर्ष की आयु तक हर महीने 4000 रुपये की धनराशि के अलावा उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा, स्वरोजगार, मकान निर्माण और शादी के लिए भी आर्थिक मदद का प्रावधान किया गया है।

नितिन कुमार ने भी इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन कर दिया और उसका यह आवेदन तुरंत मंजूर भी हो गया। अपना कारोबार आरंभ करने के लिए नितिन कुमार को मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत 2 लाख रुपये की वित्तीय मदद मिली।

इस धनराशि से नितिन कुमार ने सुजानपुर के बाजार में रेडिमेड गारमेंट्स की दुकान खोली। इस दुकान से उसका कारोबार अच्छा चल पड़ा है। अब उसको अपनी रोजी-रोटी की कोई चिंता नहीं है।

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू का बार-बार आभार व्यक्त करते हुए नितिन कुमार कहते हैं कि अगर मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना न होती तो न जाने उसको कहां-कहां भटकना पड़ता। यह योजना उसके लिए बहुत बड़ा सहारा साबित हुई है।

इसी योजना के कारण आज नितिन कुमार जैसे हिमाचल प्रदेश के हजारों बेसहारा बच्चे और युवा न केवल सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं, बल्कि अपने लिए बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने में सक्षम हो रहे हैं।

 

 

 

 

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