22वें दिन भी जारी रही भूख हड़ताल, विद्यार्थियों की अनदेखी से आक्रोशित विद्यार्थी परिषद ने की विश्वविद्यालय में तालाबंदी

हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:-   हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय हमीरपुर में विद्यार्थियों की मांगों को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की भूख हड़ताल आज 22वें दिन भी लगातार जारी रही। पिछले 22 दिनों से विद्यार्थी अपनी जायज मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अब तक विद्यार्थियों की सुध लेने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई है।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के विभाग संयोजक भवानी ठाकुर ने कहा कि विद्यार्थी परिषद लंबे समय से विद्यार्थियों की मूलभूत एवं जायज मांगों को सरकार और प्रशासन के समक्ष रख रही है।

 

परिषद की प्रमुख मांगों में हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय में कुलपति के रिक्त पद को शीघ्र भरना, सेल्फ फाइनेंस मॉडल पर चल रहे विश्वविद्यालय को सरकार की ओर से पर्याप्त वित्तीय सहयोग प्रदान करना तथा कैंपस की मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी मांगों को पूरा करना शामिल है।

 

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों ने अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए लोकतांत्रिक तरीके से हर संभव प्रयास किया। इसी कड़ी में विद्यार्थी परिषद द्वारा गांधी चौक हमीरपुर में विशाल छात्र रैली का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 2500 विद्यार्थियों ने एकजुट होकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की।

 

इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के सड़क पर उतरने के बावजूद सरकार की ओर से उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया गया।

 

भवानी ठाकुर ने कहा कि 22 दिन से विद्यार्थी भूख हड़ताल पर बैठे हैं, लेकिन विडंबना यह है कि इतने लंबे समय के बाद भी न तो सरकार का कोई प्रतिनिधि विद्यार्थियों से मिलने पहुंचा और न ही विश्वविद्यालय प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी उनकी सुध लेने आया। यह केवल विद्यार्थियों की मांगों की अनदेखी नहीं, बल्कि प्रदेश के भविष्य की आवाज को नजरअंदाज करने जैसा है।

 

उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थियों की शांतिपूर्ण आवाज को लगातार अनसुना किया गया और संवाद के सभी रास्ते बंद नजर आए, तो मजबूर होकर विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं को आज हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय में तालाबंदी करने का निर्णय लेना पड़ा।

 

उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यार्थी परिषद किसी टकराव की पक्षधर नहीं है, लेकिन जब 22 दिनों तक विद्यार्थियों की आवाज सुनने वाला कोई नहीं हो, तो आंदोलन को आगे बढ़ाना विद्यार्थियों की मजबूरी बन जाता है। परिषद सरकार से मांग करती है कि वह तत्काल विद्यार्थियों के प्रतिनिधिमंडल से वार्ता करे और उनकी मांगों के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए।

 

विद्यार्थियों का संघर्ष किसी व्यक्तिगत हित के लिए नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश के तकनीकी शिक्षा के भविष्य और विश्वविद्यालय के अस्तित्व एवं विकास से जुड़ा संघर्ष है। सरकार को समय रहते विद्यार्थियों की भावनाओं को समझते हुए सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए, ताकि आंदोलन को समाप्त कर शैक्षणिक वातावरण को सामान्य किया जा सके।

 

 

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