



आलमपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- डी.ए.वी. वरिष्ठ माध्यमिक पब्लिक स्कूल आलमपुर, जिला काँगड़ा, हिमाचल प्रदेश में 17 अक्तूबर 2026 को कक्षा नौवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों के लिए अंतर-सदनीय भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह, आत्मविश्वास और उमंग के साथ भाग लेते हुए अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।


प्रतियोगिता को विद्यार्थियों की कक्षाओं के आधार पर चार स्तरों में विभाजित किया गया था। प्रत्येक कक्षा के लिए अलग-अलग विषय निर्धारित किए गए थे। कक्षा नौवीं के विद्यार्थियों ने ‘सोशल मीडिया – विद्यार्थियों के लिए वरदान या अभिशाप’, कक्षा दसवीं के विद्यार्थियों ने ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा के लिए वरदान या चुनौती’, कक्षा ग्यारहवीं के विद्यार्थियों ने ‘तकनीक मनुष्य को अधिक जुड़ा हुआ, लेकिन कम मानवीय बना रही है’ तथा कक्षा बारहवीं के विद्यार्थियों ने ‘क्या शैक्षणिक सफलता, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में उत्कृष्टता से अधिक महत्वपूर्ण है?’ विषयों पर अपने विचार प्रभावशाली, स्पष्ट एवं तार्किक ढंग से प्रस्तुत किए।




प्रतियोगिता के परिणामों में कक्षा नौवीं के स्तर पर रिधिमा ( महात्मा आनंद स्वामी सदन) ने प्रथम तथा पुष्पित (महात्मा हंसराज सदन) ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया।







कक्षा दसवीं में सिमरन (स्वामी दयानंद सरस्वती सदन) ने प्रथम तथा श्रेयान्शी (महात्मा हंसराज सदन) ने द्वितीय स्थान हासिल किया।




कक्षा ग्यारहवीं में पारुल राणा (आनंद स्वामी सदन) ने प्रथम तथा इशिका (पंडित गुरुदत्त विद्यार्थी सदन) ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। वहीं, कक्षा बारहवीं में रिधिमा (पंडित गुरुदत्त विद्यार्थी सदन) ने प्रथम तथा अलीशा (स्वामी दयानंद सरस्वती सदन) ने द्वितीय स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।





कार्यक्रम के अंत में सभी विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, तार्किक चिंतन, प्रभावशाली संवाद-कौशल तथा मंच पर अपने विचारों को निर्भीकता से प्रस्तुत करने की क्षमता विकसित करना था।


इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य सुरजीत कुमार राणा ने अपने संदेश में कहा कि भाषण प्रतियोगिताएँ विद्यार्थियों को अपनी सोच को सही दिशा देने, विचारों को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करने और अपनी बात प्रभावशाली ढंग से रखने का अवसर प्रदान करती हैं।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियाँ न केवल विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को बढ़ाती हैं, बल्कि उनमें नेतृत्व क्षमता, तार्किक दृष्टिकोण और बेहतर संचार-कौशल का भी विकास करती हैं।





