



हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेमोरियल राजकीय महाविद्यालय, हमीरपुर में 13 से 17 अक्टूबर तक आयोजित हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के अंतर-महाविद्यालय युवा उत्सव ग्रुप-II (संगीत) का समापन समारोह उत्साह, उल्लास और सांस्कृतिक गरिमा के साथ आयोजित किया गया।

42 महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने लिया भाग; दस संगीत प्रतियोगिताओं के परिणाम घोषित, मेजबान




पांच दिवसीय इस आयोजन में प्रदेश के 42 महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने भाग लेकर अपनी संगीत प्रतिभा का प्रदर्शन किया। युवा उत्सव के दौरान शास्त्रीय संगीत, पाश्चात्य संगीत, भारतीय सुगम संगीत, लोकगीत, समूहगान और लोक ऑर्केस्ट्रा सहित दस प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।






एनएससीबीएम राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर के विद्यार्थियों ने भी हासिल किए पुरस्कार




अंतिम दिन लोक ऑर्केस्ट्रा प्रतियोगिता में 13 टीमों ने भाग लिया। इस आयोजन ने प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने के साथ-साथ विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने और विभिन्न महाविद्यालयों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान का अवसर प्रदान किया।






समापन समारोह में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के खेल एवं युवा कार्यक्रम निदेशक प्रो. संजय शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।



उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान की वास्तविक पहचान उसकी भव्य इमारतों या सुविधाओं से नहीं, बल्कि वहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों, उनकी उपलब्धियों और समाज में उनके योगदान से बनती है।

महाविद्यालय विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण, विचारों के विकास और प्रतिभाओं को निखारने के महत्वपूर्ण केंद्र होते हैं। युवा उत्सव जैसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ आत्मविश्वास, अनुशासन, सहयोग और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं।

उन्होंने कहा कि पांच दिनों तक चले इस आयोजन में विद्यार्थियों ने जिस उत्साह, समर्पण और मेहनत के साथ भाग लिया, वह सराहनीय है। इतने बड़े आयोजन की सफलता के पीछे आयोजकों, प्राध्यापकों, कर्मचारियों, स्वयंसेवकों और विद्यार्थियों की सामूहिक मेहनत होती है।
उन्होंने आयोजन की तैयारियों की तुलना एक बड़े पारिवारिक विवाह समारोह से करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों में अनेक लोग अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं, लेकिन आयोजन का वास्तविक आकर्षण उसमें भाग लेने वाले विद्यार्थी ही होते हैं।

प्रो. संजय शर्मा ने हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों की अपनी विशिष्ट लोक परंपराएं, संगीत शैलियां, बोलियां और सांस्कृतिक पहचान हैं। चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और प्रदेश के अन्य क्षेत्रों की सांस्कृतिक विविधता हमारी कमजोरी नहीं, बल्कि हमारी सबसे बड़ी ताकत है। लोकगीतों और पारंपरिक संगीत में हमारे समाज का इतिहास, जीवनशैली, भावनाएं और सामूहिक स्मृतियां समाहित हैं। युवा पीढ़ी का दायित्व है कि वह इन परंपराओं को केवल मंचों तक सीमित न रखे, बल्कि उनका सम्मान करे और उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाए। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया कि वे आधुनिक संगीत और नई कलात्मक विधाओं को अपनाते हुए अपनी जड़ों, लोक संस्कृति और पारंपरिक मूल्यों से भी जुड़े रहें। उन्होंने कहा कि कला और संस्कृति समाज को जोड़ने, आपसी समझ बढ़ाने तथा विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के बीच आत्मीयता स्थापित करने का सशक्त माध्यम हैं।
विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए मुख्य अतिथि ने कहा कि संगीत केवल एक विषय या मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि निरंतर साधना, अनुशासन और आत्मसमर्पण का मार्ग है। किसी भी कलाकार को अपनी प्रतिभा निखारने के लिए नियमित अभ्यास, धैर्य, एकाग्रता और विनम्रता को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करना खुशी की बात है, लेकिन पुरस्कार नहीं जीत पाने वाले विद्यार्थियों को निराश होने के बजाय अपनी कमियों को पहचानकर आगे बढ़ने की प्रेरणा लेनी चाहिए। हार और जीत जीवन की स्वाभाविक प्रक्रियाएं हैं, जबकि अनुभव और सीख जीवनभर साथ रहते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे शिक्षा के साथ-साथ संगीत, साहित्य, नाटक, लोक कला और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी करें, क्योंकि ऐसी गतिविधियां व्यक्तित्व को संतुलित बनाती हैं और जीवन में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने शिक्षकों और महाविद्यालयों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि विद्यार्थियों की प्रतिभा को निखारने के लिए उन्हें ऐसे अवसर लगातार उपलब्ध करवाए जाने चाहिए।
प्रो. संजय शर्मा ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और सांस्कृतिक भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने लंबे समय तक प्रदेश के विद्यार्थियों को शिक्षा, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए एक साझा मंच प्रदान किया है। बाद में सरदार पटेल विश्वविद्यालय, मंडी की स्थापना से प्रदेश के उच्च शिक्षा क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ा। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक व्यवस्थाओं में परिवर्तन समय के साथ स्वाभाविक हैं, लेकिन विद्यार्थियों के हित, संस्थानों के बीच समन्वय और सांस्कृतिक गतिविधियों की निरंतरता हमेशा प्राथमिकता रहनी चाहिए। उन्होंने आशा व्यक्त की कि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के बीच सहयोग बना रहेगा तथा विद्यार्थियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने, अपनी उपलब्धियों के प्रमाणपत्र प्राप्त करने और आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलते रहेंगे।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. संगीता सिंह ने कहा कि इतने बड़े राज्यस्तरीय युवा उत्सव की मेजबानी करना महाविद्यालय के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि युवा उत्सव विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, आत्मविश्वास, अनुशासन, टीम भावना और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देते हैं। संगीत भाषा और भौगोलिक सीमाओं से परे लोगों को जोड़ने की क्षमता रखता है। पुरस्कार प्राप्त करना महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण मेहनत करना, अपनी कमियों को पहचानना और लगातार बेहतर बनने का प्रयास करना है। उन्होंने विद्यार्थियों से हिमाचल प्रदेश की लोक संगीत परंपराओं को संरक्षित करने और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने मुख्य अतिथि, निर्णायक मंडल, विश्वविद्यालय के अधिकारियों, प्रतिभागी महाविद्यालयों, प्राध्यापकों, मीडिया प्रतिनिधियों, आयोजन समितियों, कर्मचारियों और स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त किया।
आयोजन सचिव डॉ. पूनम शर्मा ने आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी समिति संयोजकों, सदस्यों, विद्यार्थी स्वयंसेवकों और अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने वाले कर्मचारियों का धन्यवाद किया। उन्होंने महाविद्यालय की आयोजन टीम, प्रेस एवं मीडिया प्रतिनिधियों और ध्वनि व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों के विशेष योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ विभिन्न महाविद्यालयों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान, आपसी सहयोग और एकता को बढ़ावा देने का अवसर देते हैं। संयुक्त आयोजन सचिव डॉ. उमा देवी ने विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों, निर्णायक मंडल, विद्यार्थियों, प्राध्यापकों, कर्मचारियों और विभिन्न समितियों के सदस्यों का सहयोग एवं समन्वय के लिए आभार व्यक्त किया।
प्रतियोगिताओं के परिणाम
शास्त्रीय वाद्य एकल—ताल वाद्य प्रतियोगिता में जवाहर लाल नेहरू राजकीय ललित कला महाविद्यालय, शिमला के साहिल ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस राजकीय महाविद्यालय, संजौली के सूर्यांश और एसवीएसडी पीजी कॉलेज, भटोली, ऊना के बहादुर ने संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान हासिल किया। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पीजी सेंटर, शिमला के हेमंत और राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला के निखिल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
शास्त्रीय गायन एकल प्रतियोगितामें सेंटर ऑफ एक्सीलेंस राजकीय महाविद्यालय, संजौली के विशेष ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। राजकीय महाविद्यालय सोलन की निलाक्षी, राजकीय महाविद्यालय रामपुर के जसवंत और जवाहर लाल नेहरू राजकीय ललित कला महाविद्यालय, शिमला के वंश भारद्वाज ने द्वितीय स्थान हासिल किया। राजकीय महाविद्यालय थियोग के रितिक कश्यप, एनएससीबीएम राजकीय महाविद्यालय, हमीरपुर के रित्विक गिल और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पीजी सेंटर, शिमला के लेखराज ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
शास्त्रीय वाद्य एकल—गैर-ताल वाद्य प्रतियोगिता में जवाहर लाल नेहरू राजकीय ललित कला महाविद्यालय, शिमला के शुभम ने प्रथम स्थान हासिल किया। राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला के सूरज और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पीजी सेंटर, शिमला के हर्षित कुमार ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। राजकीय महाविद्यालय धामी (16 मील) की सुरभि और राजकीय महाविद्यालय देहरी के हर्ष ने तृतीय स्थान हासिल किया।
पाश्चात्य गायन एकल प्रतियोगिता में जवाहर लाल नेहरू राजकीय ललित कला महाविद्यालय, शिमला की अंजलि ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस राजकीय महाविद्यालय, संजौली की आरोही, आरकेएमवी शिमला की मुस्कान और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पीजी सेंटर, शिमला की जागृति ने द्वितीय स्थान हासिल किया। एनएससीबीएम राजकीय महाविद्यालय, हमीरपुर की अनन्या कुमारी, राजीव गांधी राजकीय महाविद्यालय, चौड़ा मैदान, शिमला के उज्ज्वल दीप सिंह गजटा और राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला के चंद्रकांत ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
भारतीय सुगम गायन प्रतियोगिता में राजकीय महाविद्यालय सोलन की निलाक्षी ने प्रथम स्थान हासिल किया। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस राजकीय महाविद्यालय, संजौली के ऋषभ रांटा ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। आरकेएमवी शिमला की हेमलता और राजकीय महाविद्यालय चंबा की पायल सूर्यवंशी ने तृतीय स्थान हासिल किया।
पाश्चात्य वाद्य एकल प्रतियोगिता में एसवीएसडी पीजी कॉलेज, भटोली, ऊना के सागर भाटिया ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। राजकीय महाविद्यालय रामपुर के एमोस ने द्वितीय स्थान हासिल किया, जबकि राजकीय महाविद्यालय घुमारवीं के रविंदर सिंह और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पीजी सेंटर, शिमला के वंशुल मलिया ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
लोकगीत प्रतियोगिता में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पीजी सेंटर, शिमला के विवेक ठाकुर ने प्रथम स्थान हासिल किया। जवाहर लाल नेहरू राजकीय ललित कला महाविद्यालय, शिमला के सूर्यांश पुंडीर, राजकीय महाविद्यालय रामपुर की प्रिया, राजकीय महाविद्यालय आनी, हरिपुर की प्रिया और एलबीएस राजकीय महाविद्यालय सरस्वती नगर की संजना ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। राजकीय महाविद्यालय चंबा के गौरव, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस राजकीय महाविद्यालय, संजौली के विशेष, राजकीय महाविद्यालय राजगढ़, सिरमौर के अक्षत और एनएससीबीएम राजकीय महाविद्यालय, हमीरपुर के दिक्षांत कुमार भारद्वाज ने तृतीय स्थान हासिल किया।
पाश्चात्य समूहगान प्रतियोगिता में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस राजकीय महाविद्यालय, संजौली ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। राजकीय महाविद्यालय सोलन, जवाहर लाल नेहरू राजकीय ललित कला महाविद्यालय, शिमला और एनएससीबीएम राजकीय महाविद्यालय, हमीरपुर ने द्वितीय स्थान हासिल किया। राजकीय महाविद्यालय रामपुर, राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पीजी सेंटर, शिमला ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
भारतीय समूहगान प्रतियोगिता में राजकीय महाविद्यालय रामपुर ने प्रथम स्थान हासिल किया। जवाहर लाल नेहरू राजकीय ललित कला महाविद्यालय, शिमला, राजकीय महाविद्यालय सोलन और राजकीय महाविद्यालय ऊना ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। आरकेएमवी शिमला, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पीजी सेंटर, शिमला और राजकीय महाविद्यालय चुवाड़ी ने तृतीय स्थान हासिल किया।
लोक ऑर्केस्ट्रा प्रतियोगिता में राजकीय महाविद्यालय घुमारवीं ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। राजकीय महाविद्यालय आनी, हरिपुर, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पीजी सेंटर, शिमला और एलबीएस राजकीय महाविद्यालय सरस्वती नगर ने द्वितीय स्थान हासिल किया। एनएससीबीएम राजकीय महाविद्यालय, हमीरपुर, राजकीय महाविद्यालय थियोग और राजकीय महाविद्यालय चुवाड़ी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
मेजबान एनएससीबीएम राजकीय महाविद्यालय, हमीरपुर के विद्यार्थियों ने भी विभिन्न प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। शास्त्रीय गायन एकल में रित्विक गिल ने तृतीय स्थान, पाश्चात्य गायन एकल में अनन्या कुमारी ने तृतीय स्थान और लोकगीत प्रतियोगिता में दिक्षांत कुमार भारद्वाज ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। महाविद्यालय की पाश्चात्य समूहगान टीम ने द्वितीय स्थान तथा लोक ऑर्केस्ट्रा टीम ने तृतीय स्थान हासिल कर महाविद्यालय का गौरव बढ़ाया।
पांच दिवसीय युवा उत्सव ने प्रदेश के विभिन्न महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, सांस्कृतिक अनुभव साझा करने और आपसी संबंध मजबूत करने का अवसर प्रदान किया। महाविद्यालय प्रशासन ने आयोजन की सफलता में योगदान देने वाले सभी प्रतिभागियों, निर्णायकों, विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों, आयोजन समितियों, कर्मचारियों, स्वयंसेवकों और मीडिया प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया। आयोजन के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने और युवाओं को कला एवं संगीत से जोड़ने का संदेश दिया गया।




