



हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) तथा हिमाचल प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ के अंतर्गत 27 अक्टूबर 2026 को हिम अकादमी पब्लिक स्कूल, विकास नगर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

बाल अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा और साइबर सुरक्षा पर दिया विशेष बल




कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को बाल अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, पॉक्सो (POCSO) अधिनियम तथा कानूनी सहायता के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हमीरपुर के अध्यक्ष एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंकज शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।






चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की दी जानकारी




उनके साथ थाना प्रभारी (SHO) निर्मल सिंह, पुलिस विभाग के साइबर सेल एवं महिला पुलिस स्टेशन, हमीरपुर से राज कुमार (HPS), बाल कल्याण समिति (CWC), हमीरपुर के सदस्य अश्वनी कुमार, पैनल अधिवक्ता स्नेह लता तथा सब-इंस्पेक्टर संजीव कुमार भी उपस्थित रहे।





सभी अतिथियों ने विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों पर महत्त्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को बाल अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा, अच्छे एवं बुरे स्पर्श की पहचान तथा साइबर अपराधों से बचाव के बारे में विस्तारपूर्वक समझाया।


उन्होंने ऑनलाइन गतिविधियों के दौरान निजी जानकारी साझा न करने, अनजान लोगों से सतर्क रहने और किसी भी असहज परिस्थिति में चुप रहने के बजाय अभिभावकों, शिक्षकों अथवा किसी विश्वसनीय वयस्क से सहायता लेने के लिए प्रेरित किया।
साथ ही, पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत बच्चों को प्राप्त कानूनी संरक्षण और शिकायत दर्ज करवाने की प्रक्रिया की जानकारी भी दी गई।
इस अवसर पर विद्यार्थियों को चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 के बारे में बताया गया। उन्हें समझाया गया कि संकट या सहायता की आवश्यकता होने पर इस हेल्पलाइन के माध्यम से मदद प्राप्त की जा सकती है।
विशेषज्ञों ने बच्चों को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने और किसी भी प्रकार की असुरक्षा की स्थिति में उचित सहायता लेने का संदेश दिया। विद्यालय अकादमिक प्रधानाचार्या डॉ. हिमांशु शर्मा, उपप्रधानाचार्य अश्विनी कुमार तथा मुख्याध्यापिका कंचन लखनपाल ने अतिथियों का औपचारिक स्वागत किया।

उन्होंने विद्यार्थियों की सुरक्षा, आत्मविश्वास और सर्वांगीण विकास के लिए ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों को महत्त्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को यह समझने में सहायता की कि जागरूकता, सतर्कता और सही समय पर सहायता माँगना सुरक्षित बचपन की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम हैं।
विद्यालय ने बच्चों के अधिकारों, सुरक्षा एवं कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए इस पहल को उपयोगी बताया।




