



शिमला/विवेकानंद वशिष्ठ :- एसएफआई ने जिला सम्मेलन से पहले विशाल छात्र रैली आयोजित की जिसमें कुल 350 छात्र शामिल हुए । रैली में स्कूल बचाओ,राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 हटाओ, सार्वजनिक शिक्षा बचाओ व प्रदेश में बढ़ते सांप्रदायिकता पर रोक के खिलाफ जमकर छात्रों द्वारा नारे बाज़ी की गई ।


रैली में हिमाचल प्रदेश के राज्य अध्यक्ष अनिल ठाकुर व राज्य सचिव सनी सेकटा मौजूद रहे रैली का संबोधन SFI शिमला जिला सचिव पवन द्वारा किया गया रैली को संबोधित करते हुए देश व प्रदेश में लगातार सार्वजनिक शिक्षा पर हो रहे हमलों के खिलाफ छात्रों को एकजुट होने की अपील की।




उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार भी मोदी सरकार की भांति शिक्षा का निजीकरण, बाजारीकरण करने पर तुली हुई है। एक ओर कांग्रेस पार्टी पूरे देश में नई शिक्षा नीति (एनईपी-2020) का विरोध कर रही है, वहीं दूसरी ओर हिमाचल सरकार इसे पिछले तीन वर्षों में प्रदेश की सरकार ने 818 स्कूलों को डीनोटिफ़ाई किया गया है व 535 स्कूलों को मर्ज किया गया। सरकार ने 100 सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ने का निर्णय लिया है। जिससे सरकार की शिक्षा को केन्द्रीयकरण, निजीकरण व शिक्षा को एक वस्तु के समान बेचने की नीति साफ़ दिख रही है।







सरकारी स्कूल में ड्रॉप आउट –
हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में तीन साल के दौरान एक लाख विद्यार्थियों ने ड्रॉप आउट किया हैं। साल 2022-23 के मुकाबले 2024-25 के आंकड़ों में यह खुलासा हुआ है। इस अवधि में 57,290 लड़कों और 46,368 लड़कियों ने सरकारी स्कूल छोड़कर निजी संस्थानों में दाखिले लिए हैं। साल 2022-23 में स्कूलों मेंं विद्यार्थियों का नामांकन 8,0900 था। तीन साल बाद यह 7,05342 रह गया है। जो कि चिंता का विषय है।


छात्र संघ चुनाव पर प्रतिबंध छात्रों का जनवादी अधिकार, छात्र संघ चुनाव हिमाचल प्रदेश में पिछले लगभग 12 वर्षों से बंद है। इसके बदले अब कैंपस में नामांकित SCA का गठन किया जा रहा है। यह अप्रत्यक्ष SCA मात्र अपने शपथ समारोह के अलावा कभी भी नजर नहीं आती है।



यह प्रशासन की छात्र विरोधी नीतियों का कभी भी विरोध नहीं करती है और ना ही छात्रों के मुद्दों को प्रशासन के समक्ष उठाती हैं। कैंपस का वातावरण पूरी तरह से गैर जनवादी बना हुआ है। प्रशासन या सरकार सरकार की नीतियों के खिलाफ यदि कोई आवाज बुलंद करता है तो उसे अनेक प्रकार के हथकंडों द्वारा दबाया जाता है या उसे मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया जाता है।


शिक्षा का भगवाकरण पूर्व की भाजपा सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से लेकर तमाम शैक्षणिक संस्थानों में गैर कानूनी प्रक्रिया द्वारा अपने संघी प्रोफेसर को भरने का काम किया गया। जिसका सबसे बड़ा उदाहरण हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय है। वर्ष 2020 में कोरोना के काल में पूर्व की भाजपा सरकार द्वारा प्रोफेसर भर्ती की जाती है। 2022 में जब एस एफ आई द्वारा उन भर्तियों पर आरटीआई लगाई जाती है तब इस बात का खुलासा होता है कि 70 फ़ीसदी से अधिक प्रोफेसर गैर कानूनी प्रक्रिया से भर्ती किए गए हैं।
इन सभी मुद्दों को रैली में संबोधित करते हुए कहा कि 22 से 23 नवंबर 2025 दो दिवसीय जिला सम्मेलन में हम सार्वजनिक शिक्षा के ढांचे को बचाए रखने के लिए एक आंदोलन की रूप रेखा तैयार कर प्रदेश सरकार के खिलाफ़ आंदोलन तैयार करेगी।


















