विकसित भारत की संकल्पना, विकसित हिमाचल के बिना अधूरी: अनुराग सिंह ठाकुर

हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:-  पूर्व केंद्रीय मंत्री व हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने पंजाब के रूपनगर में हिमाचल वेलफेयर सभा द्वारा आयोजित हिम उत्सव कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के प्रवासी गणमान्यों से भेंट कर प्रदेश के विकास से जुड़े अपने विचार साझा किए तथा समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रबुद्धजनों को सम्मानित किया।

हिमाचल में कांग्रेस खटाखट के नाम पर चला रही खटारा मॉडल: अनुराग सिंह ठाकुर

अनुराग सिंह ठाकुर ने अपने संबोधन में हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि देवभूमि हिमाचल अपनी नैसर्गिक सुंदरता, समृद्ध परंपराओं और वीरों के अद्वितीय शौर्य के लिए देशभर में विशिष्ट पहचान रखता है।

उन्होंने कहा कि भारत की विकास यात्रा में हिमाचल प्रदेश का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है और यहां के लोगों ने अपनी मेहनत और समर्पण से देश और विश्व स्तर पर मजबूत पहचान बनाई है। उन्होंने इस अवसर को प्रदेश की संस्कृति, परंपरा और गौरवशाली इतिहास को आगे बढ़ाने तथा एकजुटता को सुदृढ़ करने का अवसर बताया।

उन्होंने हिम उत्सव के अवसर पर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को नमन करते हुए कहा कि हिमाचल के वीरों ने अपने साहस और पराक्रम से देश का गौरव बढ़ाया है।

 

कारगिल युद्ध का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस युद्ध में हिमाचल के जवानों ने अदम्य साहस का परिचय दिया, जिसमें प्रदेश के 52 वीरों ने सर्वोच्च बलिदान दिया।

 

इस युद्ध में कैप्टन विक्रम बत्रा और राइफलमैन संजय कुमार को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया, जबकि हिमाचल के वीरों को अनेक अन्य सैन्य सम्मान भी प्राप्त हुए, जिससे प्रदेश का नाम गौरवान्वित हुआ।

 

अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि समावेशी विकास तभी संभव है जब केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर कार्य करें, लेकिन हिमाचल में वर्तमान कांग्रेस सरकार इस दिशा में विफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में उधार लो और कर्ज लो की नीति पर कार्य हो रहा है, जिसके कारण राज्य पर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज हो चुका है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले कई वादे किए थे, जो आज तक पूरे नहीं हुए।

 

महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के वादे अधूरे हैं और युवाओं को स्थायी रोजगार देने के बजाय अनुबंध आधारित नौकरियां दी जा रही हैं, जिससे अस्थिरता की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि खटाखट मॉडल अब खटारा मॉडल बनकर रह गया है, जिससे आम जनता परेशान है।

 

उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2014 के बाद हिमालयी राज्यों के लिए विशेष योजना और विकास पर ध्यान दिया गया है। पहले की तुलना में इन राज्यों को अधिक वित्तीय सहायता और सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

 

हिमालयी राज्यों की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए हिमालयी राज्य क्षेत्रीय परिषद की स्थापना की गई, जो जल सुरक्षा, सतत पर्यटन, सतत कृषि, डेटा प्रबंधन और कौशल विकास को बढ़ावा देने का कार्य कर रही है।

 

उन्होंने कहा कि विकसित भारत का मार्ग हिमाचल से होकर गुजरता है और विकसित भारत की परिकल्पना तब तक पूर्ण नहीं हो सकती जब तक हिमाचल का समग्र विकास सुनिश्चित न हो।

 

 

[post-views]